देहरादून। भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (एनसीआईएसएम) के निर्देश पर उत्तराखंड के आयुर्वेदिक और यूनानी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड ने इस संबंध में सभी कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को पत्र जारी किया है।
परिषद के अध्यक्ष डॉ. जेएन नौटियाल ने एक अक्तूबर को पत्र जारी कर कहा कि संबंधित राज्य परिषद में पंजीकरण के बिना शिक्षण कार्य या चिकित्साभ्यास वैध नहीं होगा। शिक्षकों के लिए दो प्रकार के पंजीकरण उपलब्ध हैं। उत्तराखंड में कार्यरत शिक्षक पांच वर्ष के लिए स्थायी पंजीकरण करवा सकते हैं। यदि कोई शिक्षक अपने मूल राज्य के साथ उत्तराखंड में भी पंजीकरण चाहता है तो वह अस्थायी पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकता है। यह अस्थायी पंजीकरण प्रत्येक एक वर्ष में नवीनीकृत किया जाएगा।
(ब्यूरो)