समाज कल्याण विभाग की ओर से स्कूली बच्चों की छात्रवृत्ति ऑनलाइन क्या हुई, इनकी संख्या ही घट गई।
देहरादून जिले की ही बात करें तो एक लाख के नजदीक पहुंच चुका आंकड़ा अब 24 हजार पर आकर टिक गया है। गांव के स्कूल ऑनलाइन फार्म नहीं भर पा रहे हैं, जिन स्कूलों ने कोशिश कर फार्म भरे हैं, उनकी छात्रवृत्ति भी नहीं दी जा रही है। विभाग तीन महीने से सिर्फ डेट पर डेट बढ़ाए जा रहा हैं।
समाज कल्याण विभाग की ओर से छात्रवृत्ति की व्यवस्था ऑनलाइन करने के साथ ही स्कूलों की परेशानी बढ़ गई। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल प्रबंधन को इससे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। पहले तो इन स्कूलों को समझ ही नहीं आया कि आखिर फार्म कैसे भरने हैं, फार्म भरने के बाद भी उसमें कई कमियां रह गई।
स्कूलों की ओर से कई बार प्रयास कर जैसे-तैसे फार्म भरे गए। इसके बावजूद तीन महीने से ऑनलाइन आवेदन किए जाने की तिथि ही बढ़ाई जा रही है। जिन छात्रों के फार्म भरकर आ चुके हैं। उनकी स्कालरशिप जारी नहीं करने से अभिभावक परेशान हैं और अक्सर ही विभाग के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है।
ये है मामला
दरअसल विभाग के पास बजट ही नहीं है और वह छात्रों को लटकाए हुए हैं। ऐसे में एक ही विभाग की ओर से यह कहकर आवेदन की तिथि बढ़ाई जा रही है कि फार्म पूरे नहीं आए या जो आए भी हैं उनमें कमियां हैं। जबकि जिन स्कूलों को आवेदन करना था, वह कर चुके हैं। ऑनलाइन के झंझटों से बचने के लिए स्कूल इससे दूरी बनाए हुए हैं।
जिले में मात्र 24000 छात्र
जिले में जहां कक्षा पांचवीं से बारहवीं तक एससी, एसटी, ओबीसी के करीब एक लाख छात्र छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करते थे। उनकी संख्या इस बार 24 हजार पर आकर टिक गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों को अधिक परेशानी हो रही है। उन्हें नहीं समझ आ रहा है कैसे फार्म भरना है। इसमें मैंने अपने क्षेत्र के स्कूलों की मदद की। फार्म भरने के बावजूद तीन महीने से स्कालरशिप के लिए लटकाया हुआ है। जबकि नई कक्षा में दाखिला होते ही स्कॉलरशिप मिल जानी चाहिए थी।
- अजय कुमार, समाज सेवी
किसको-कितनी मिलती है छात्रवृत्ति
कक्षा एक से पांच- 600 रुपये
कक्षा 6 से 8- 960 रुपये
कक्षा 9 से 10- 2250
कक्षा 11 से 12- 2750
बार-बार करा रहे पासबुक अपडेट
जीआईसी दूधली में पढ़ने वाली रंजीता ने बताया कि अभिभावक हर दूसरे दिन उसकी पासबुक की एंट्री करा रहे हैं लेकिन अब तक छात्रवृत्ति नहीं आई है। वह अकेली ऐसी नहीं है बल्कि डोईवाला, बंजारावाला में पढ़ने वाली रेखा, पुष्पा सहित कई ऐसी छात्राएं और छात्र हैं, जिनके फार्म भरने के तीन महीने बाद भी छात्रवृत्ति का कुछ पता नहीं है।
आवेदन पत्रों में कुछ कमियां हैं, इसलिए डेट बढाई जा रही है। फिलहाल विभाग के पास छात्रवृत्ति के लिए बजट भी नहीं है। बजट आने पर जितनों को दे सकेंगे, छात्रवृत्ति दे दी जाएगी।
- अनुराग शंखधर, जिला समाज कल्याण अधिकारी