उन्होंने संविदा पर हाल ही में की गई एक लिपिक की नियुक्ति का मामला उठाते हुए कहा कि इसे पूर्व में निरस्त कर दिया गया था, लेकिन अब फिर से नियुक्ति दे दी गई है। जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष अमित चौहान ने कर्मचारियों की बात पर सहमति जताई और नियुक्ति निरस्त करने की संस्तुति कर दी।
चौहान के अनुसार, जब तमाम नियुक्तियां आउटसोर्स पर की जा रही हैं तो फिर एक नियुक्ति संविदा पर करने का औचित्य क्या है। या तो सभी नियुक्तियां संविदा पर हों या फिर इसे तुरंत निरस्त किया जाए। इस संबंध में बैंक महाप्रबंधक/सचिव वंदना श्रीवास्तव से बात नहीं हो पाई। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
अत्याधिक कमी, लेकिन भर्ती एक पद पर
जिला सहकारी बैंक में चतुर्थ श्रेणी के ही करीब 60 पद खाली चल रहे हैं। इसके अलावा तृतीय श्रेणी के भी कई पद हैं। बैंक यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि काफी पद खाली होने के बावजूद अनुमति सिर्फ एक पद के लिए लिया जाना सवाल खड़ा करता है।
इस एक नियुक्ति को भी आउटसोर्स पर नहीं किया गया, बल्कि संविदा पर किया गया है, जबकि बैंक में सात-आठ साल से लगातार काम कर रहे कई कर्मचारियों को आउटसोर्स पर ही लिया गया है। पदाधिकारियों का इस बात पर भी एतराज है कि संविदा के इस पद के लिए कोई विज्ञप्ति नहीं निकाली गई।