यूपी में कार्यरत कार्यकारी अधिकारी आदिल सिद्दीकी को उत्तराखंड में सेवा विस्तार दिए जाने के मामले की जांच पूरी हो गई है। जानिए पूरा मामला....
यह रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई है। इस मामले में अब तत्कालीन वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी से सिद्दीकी को दिए गए वेतन की रिकवरी और वाद दायर किए जाने की तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही लेखा परीक्षा रिपोर्ट में उठाए गए बिंदुओं पर वक्फ बोर्ड ने फिर से आडिट कराया है।
वक्फ बोर्ड इस रिपोर्ट के आधार पर शासन को आख्या सौंपेगा। लेखा परीक्षा की रिपोर्ट में उत्तराखंड वक्फ बोर्ड में यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड के कार्यकारी अधिकारी आदिल सिद्दीकी को सेवा विस्तार दिए जाने के मामले पर उंगली उठाई गई थी? रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि सिद्दीकी के सेवा विस्तार के संबंध में शासन का अनुमोदन और स्वीकृति आदेश उपलब्ध कराया गया।
अन्य कई बिंदुओं पर भी उठाए गए सवाए
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- फोटो : amar ujala/ file photo
इसके अलावा अन्य बिंदुओं पर भी सवाए उठाए गए। लेखा परीक्षा टीम ने वर्ष 2013-14 से वर्ष 2015-16 के बीच के कार्यों का आडिट किया था। इस पर शासन ने बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहम्मद अलीम अंसारी से आख्या मांगी।
लेखा परीक्षा की रिपोर्ट आने के बाद वक्फ बोर्ड ने अलग से वर्ष 2013-14 से वर्ष 2016-17 तक का आडिट करा लिया है। इसकी रिपोर्ट भी तैयार हो गई है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी अंसारी ने बताया कि दोनों रिपोर्ट का मिलान कराकर शासन को आख्या भेजी जाएगी।
कुछ अभिलेख अभी उनके पास नहीं है, लेखा परीक्षा टीम से वह अभिलेख मांगे गए हैं। लेखा परीक्षा टीम की रिपोर्ट के अलावा इसी मामले की एक अन्य जांच और है जो शासन ने शुरू कराई थी। उसकी रिपोर्ट भी शासन को मिल गई है।
सिद्दीकी ने जो काम किया फाइलें सब के सामने
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आदिल सिद्दीकी की नियुक्ति के वक्त राव काले खां बोर्ड के चेयरमैन और रियासत अली मुख्य कार्यकारी अधिकारी रहे हैं। दोनों रिपोर्ट के आधार पर अब आदिल सिद्दीकी को दिए गए वेतन की रिकवरी की तैयारी की जा रही है। इस मामले में जल्दी ही वाद भी दायर हो सकता है। अंसारी ने बताया कि रिपोर्ट पर निर्णय शासन को लेना है।
आदिल ने काम किया उसको वेतन, घपला कहां हुआ
वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन राव काले खां ने बताया कि राज्य सरकार ने यूपी सरकार को चार अधिकारियों की डिमांड भेजी रखी थी। उनके कार्यकाल के दौरान यूपी ने आदिल सिद्दीकी और राव वाजिद को दिया। इन्होंने ज्वाइन कर लिया। सरकार को भी अवगत कराया गया।
बोर्ड केे सदस्यों और शासन को कोई आपत्ति नहीं थी। सचिव अल्पसंख्यक कल्याण ने सिद्दीकी को सचिवालय के पास का आर्डर किया। सिद्दीकी ने काम किया उसका नियमानुसार वेतन दिया गया। यहां घपला कहां से हो गया? जब हल्द्वानी की रहने वाली मंत्री से कुछ पंगा हुआ तो उसे हटा दिया गया। सिद्दीकी ने जो काम किया फाइलें सब के सामने हैं।
आदिल की नियुक्ति वैध
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वक्फ बोर्ड के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी रियासत अली का कहना है कि अगस्त, वर्ष 2014 में आदिल सिद्दीकी की नियुक्ति पूरी तरह वैध है। बोर्ड स्वायत्त संस्था है। उसे अपनी जरूरत के हिसाब से कर्मचारी रखने और हटाने का अधिकार है। यूपी सरकार ने नियमों का अनुपालन करते हुए आदिल सिद्दीकी को दो साल के लिए सेवा विस्तार दिया था।
दो अधिकारियों को यूपी वक्फ बोर्ड से मांगा गया था। इसके लिए पत्र भेजा गया। वक्फ बोर्ड के सदस्यों ने सिद्दीकी की नियुक्ति पर सहमति दी थी। इस संबंध में शासन को भी पत्र भेजकर अवगत कराया गया था।
तत्कालीन मंत्री के समर्थक को छेड़ने पर बढ़ा मामला
विभागीय सूत्रों ने बताया कि आदिल सिद्दीकी के तत्कालीन राज्य सरकार से हैवीवेट मंत्री से पंगा लेना भारी पड़ा। हुआ यह कि इस मंत्री का एक समर्थक वक्फ बोर्ड की संपत्ति पर अवैध कब्जा किए हुए था। सिद्दीकी ने उसे नोटिस भेज दी। समर्थक ने मंत्री से शिकायत की। मंत्री ने फोन करके सिद्दीकी को हड़काना शुरू किया तो सिद्दीकी ने भी डपट दिया। इस पर मंत्री ने तत्काल हटवा दिया और जांच शुरू करा दी।