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नाटक करना है तो लाओ 4000 रुपए

Mon, 26 May 2014 05:04 PM IST
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून
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विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक झलक एक मंच पर पेश करने और नाट्य कलाकारों को मंच प्रदान करने के नाम पर आयोजित होने वाला भारत संस्कृति दर्पण नाट्य महोत्सव शुरुआत के साथ ही विवाद में उलझ गया है।
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दून घाटी रंगमंच ने कलाकारों से की वसूली
आयोजन में मंच देने के लिए आयोजक संस्था दून घाटी रंगमंच ने कलाकारों से वसूली कर डाली। एक नाटक की प्रस्तुति पर 4000 और लोकगीतों की प्रस्तुति पर 2500 रुपए लिए गए।

कलाकारों ने भी बेहतर मंच के नाम पर यह रकम तो देदी, लेकिन आयोजन में पहले ही दिन असुविधाओं से जूझने के बाद उनकी नाराजगी बढ़ गई।

खास बात यह है कि इस आयोजन के लिए संस्कृति विभाग प्रतिवर्ष संस्था को एक से डेढ़ लाख रुपए का अनुदान भी देता है। ऐसे में सवाल उठते ही संस्था वसूली गई रकम को रजिस्ट्रेशन फीस बताने लगी है।
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पहले संस्था दावा कर रही थी कि कलाकारों के रहने-खाने का प्रबंध निशुल्क है। अब रजिस्ट्रेशन फीस इसी एवज में लिए जाने की बात कही जा रही है।

देहरादून के टाउन हाल में रविवार से प्रारंभ हुए इस चार दिवसीय आयोजन में दस राज्यों के करीब 300 कलाकार प्रतिभाग कर रहे हैं।

पैसे ले लिए, सुविधा नहीं दी
सहारनपुर से टीम लेकर आए सतनाम सिंह ने बताया कि उनका दल नाटक प्रस्तुत करने वाला है।

अच्छे मंच की उम्मीद में टीम ने पैसे जमा तो कराए, लेकिन यहां पहुंचे तो पता चला कि मंच पर नई तकनीक का इस्तेमाल तक नहीं किया जा रहा है।

सतनाम के मुताबिक मंच पर फिक्स्ड लाइट्स ही लगी हैं, जबकि इफेक्ट्स डालने के लिए अच्छी लाइट चाहिए। बताया कि उन्होंने खुद अपने खर्चे पर कुछ लाइटें मंगाकर लगवाने की कोशिश की तो आयोजकों ने मना कर दिया।

बोले, जो मिल रहा है उसमें ही काम चलाइए। सतनाम ने बताया कि उन्हें कालूमल धर्मशाला में ठहराया गया था, लेकिन यहां दिनभर बिजली न होने से कलाकार आराम तक नहीं कर सके।

संस्था की ओर से जेनरेटर तक की व्यवस्था नहीं थी। कई दूसरे कलाकार भी इसी तरह की शिकायत करते दिखाई दिए।

कलाकारों से रजिस्ट्रेशन फीस ली गई है। यह फीस न ली जाती तो यहां मंचन करने वालों की भीड़ लग जाती। ऐसे में उनके रहने-खाने की व्यवस्था हम कैसे कर पाते? उनके रहने-खाने के लिए तो पैसे लेने ही थे। संस्कृति विभाग भी कम पैसे देता है तो आयोजन में खर्च होने वाले आठ लाख रुपए कहां से आते।
- लक्ष्मी नारायण, आयोजक

विभाग में ऐसा प्रावधान नहीं है कि हर साल एक ही ग्रुप को राशि दी जाएगी। इसके बावजूद कलाकारों के प्रोत्साहन के लिए दून घाटी रंगमंच को एक से डेढ़ लाख रुपए दिए जाते हैं। विभाग को सभी समूहों को पैसा देना होता है। यदि यह राशि उनके लिए कम है तो इसमें विभाग कुछ नहीं कर सकता।
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- वीना भट्ट, प्रभारी निदेशक, संस्कृति विभाग
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