उत्तराखंड में सिडकुल के उद्योगों पर मंदी की तलवार लटक रही है। हाल में ही पांच उद्योगों के बाद ऑटो सेक्टर के दस और उद्योग बंदी की कगार पर पहुंच गए हैं।
उद्योगों को संजीवनी नहीं मिली तो करीब 300 उद्योग यहां से पलायन कर सकते हैं। वहीं मंदी की चपेट के चलते विभिन्न बैंकों का उद्योगों पर करीब 700 करोड़ रुपये फंसा हुआ है। अधिकांश उद्योग कर्ज न चुका पाने की स्थिति में पहुंच गए हैं। सिडकुल पंतनगर के उद्योगों को इस समय संजीवनी की सख्त जरूरत है।
2004-05 में नारायण दत्त तिवारी के प्रयासों से स्थापित सिडकुल के उद्योग वर्तमान में बुरे दौर से गुजर रहे हैं। मांग न मिलने के कारण अधिकांश में उत्पादन दस से तीस फीसदी तक कम हो चुका है। हाल के दिनों में ही एचसीएल, जेनेंद्रा आटो, ब्रुशमैन, यूएस फूड और लखानी ऑटो उद्योग बंद हो चुके हैं।
ऑटो सेक्टर के ही दस और उद्योगों पर बंदी की तलवार लटकती नजर आ रही है। सिडकुल स्थापना के बाद अब तक करीब 25 उद्योग यहां से दूसरी जगह शिफ्ट कर दिए गए हैं। करीब 300 उद्योगों की सुध नहीं ली गई तो वे भी दम तोड़ सकते हैं। लीड बैंक अधिकारी विपिन तिवारी के अनुसार जिले के सभी बैंकों का उद्योगों पर करीब सात सौ करोड़ रुपये का कर्ज है।
सिडकुल इंटरप्रिन्योर वेलफेयर सोसायटी अध्यक्ष अजय तिवारी का कहना है कि वर्तमान में एक्साइज और इनकम टैक्स में दस वर्ष की ही छूट दी जाती है और अधिकांश उद्योगों के दस वर्ष की अवधि इसी साल पूरी हो रही है। ऐसे में एक्साइज और इनकम छूट की अवधि को पांच साल के लिए और बढ़ाया जाना बेहद जरूरी हो गया है।
वहीं सिडकुल आरएम जीपी दुर्गापाल का कहना है कि पांच उद्योगों के अलावा दस और उद्योगों की स्थिति खराब चल रही है। कहा कि कुछ उद्योग पहले भी यहां से अन्यत्र स्थानांतरित हो चुके हैं।