रुड़की में भाजपा, कांग्रेस और बसपा के बागी निकाय चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों का समीकरण बिगाड़ सकते हैं। हालांकि, अभी इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन बगावत कर चुनावी मैदान में उतरे उम्मीदवारों से पार्टी प्रत्याशियों को नुकसान होना लाजिमी है। ऐसी स्थिति में तीनों पार्टियां बागी उम्मीदवारों से होने वाले नफे-नुकसान का आकलन करने में जुटी हैं।
निकाय चुनाव में भाजपा, कांग्रेस और बसपा तीनों पार्टियां टिकट वितरण के बाद बगावत का सामना कर रही हैं। ऐन वक्त पर टिकट कटने के कारण दावेदारों में असंतोष की स्थिति बनी हुई है। इसमें से कई तो दूसरे दलों या फिर निर्दलीय मैदान में भी उतर चुके हैं। झबरेड़ा नगर पंचायत की बात करें तो यहां अध्यक्ष पद के लिए भाजपा से दीपक सैनी टिकट के दावेदार थे, लेकिन भाजपा ने ऐन वक्त पर मानवेंद्र सिंह को प्रत्याशी घोषित कर दिया। माना जा रहा है कि मानवेंद्र सिंह का टिकट फाइनल कराने में विधायक देशराज कर्णवाल ने अहम भूमिका निभाई है। इसके कारण दो दिन पहले दीपक सैनी के समर्थकों ने विधायक के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए उन्हें उस रास्ते से नहीं गुजरने दिया, जिससे दीपक सैनी निकल रहे थे। इसके सबके बाद दीपक सैनी बसपा के सिंबल पर मैदान में है।
यहां माना जा रहा है कि दीपक सैनी पार्टी प्रत्याशी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके साथ ही लक्सर में बसपा ने कई दावेदारों को दरकिनार कर अरुण सिंह को मैदान में उतारा है। यहां टिकट के दावेदार कर रहे देवेंद्र सिंह और प्रेम सिंह पुंडीर ने भी निर्दलीय ताल ठोकी है। यहां देवेंद्र सिंह, अरुण सिंह के लिए इस कारण भी नुकसानदायक साबित हो सकते है, क्योंकि देवेंद्र सिंह भी गुर्जर बिरादरी से संबंध रखते हैं। इसके अलावा मंगलौर से पूर्व विधायक सरवत करीम अंसारी अपने नजदीकी डॉक्टर शमशाद के लिए टिकट मांग रहे थे, लेकिन बसपा ने उनको दरकिनार कर जुल्फिकार अंसारी को टिकट दिया है। यहां भी डॉक्टर शमशाद के बगावती तेवर जुल्फिकार के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते है। हालांकि, देखने वाली बात यह होगी कि बागी किसको कितना नफा-नुकसान पहुंचाते हैं।