फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

निकाय चुनाव 2018: ये बागी नेता बिगाड़ सकते हैं भाजपा-कांग्रेस का गणित, पार्टी के लिए बने मुसीबत

Thu, 25 Oct 2018 08:19 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
बीजेपी, कांग्रेस
विज्ञापन

प्रदेश में निकाय चुनाव में भाजपा व कांग्रेस बागी प्रत्याशियों के कारण असहज स्थिति में है। नई टिहरी, चंबा, नरेंद्रनगर, मुनिकीरेती नगर पालिका और घनसाली, लंबगांव नगर पंचायत सीट पर अध्यक्ष पद के लिए दोनों दलों के बागी प्रत्याशी अधिकृत प्रत्याशियों का गणित बिगाड़ सकते हैं। बागियों को मनाने में भाजपा और कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को फिलहाल कामयाबी नहीं मिल पाई है। 

विज्ञापन


नई टिहरी नगर पालिका में अध्यक्ष पद पर भाजपा ने जाखणीधार की ब्लॉक प्रमुख बेबी असवाल को अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया है। वहीं टिकट की दूसरी प्रमुख दावेदार और भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष सुषमा उनियाल ने भी निर्दलीय नामांकन करवाकर भाजपा की चिंता की बढ़ा दी है। चंबा सीट पर अध्यक्ष पद के लिए भाजपा की अधिकृत प्रत्याशी मनोज नकोटी को टिकट देने से खफा दूसरी दावेदार वरिष्ठ नेत्री निर्मला बिष्ट, महिला मोर्चा की मंडल अध्यक्ष सोबनी धनोला और सुनीता पुंडीर ने भी निर्दलीय नामांकन दाखिल किया है।

नरेंद्रनगर में अधिकृत प्रत्याशी राजेंद्र विक्रम सिंह पंवार के खिलाफ मंडल अध्यक्ष राजपाल पुंडीर और रविंद्र दत्त सकलानी ने निर्दलीय नामांकन करवाया है। देवप्रयाग में विद्यार्थी पालीवाल अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ बागी चुनाव मैदान में उतरे हैं। मुनिकीरेती में योगेश राणा ने पार्टी से बगावत कर निर्दलीय नामांकन कराया है। घनसाली में टिकट न मिलने से खफा पूर्व मंडल अध्यक्ष साहब सिंह कुमाईं, खुशहाल रावत, सुरेंद्र बडोनी व सुरेंद्र रावत ने भी निर्दलीय नामांकन करवाया है। कीर्तिनगर में मुन्नी देवी ने निर्दलीय नामांकन कर भाजपा की मुसीबतें बढ़ाई है। भाजपा जिलाध्यक्ष संजय नेगी ने कहा कि रूठे लोगों को अधिकृत प्रत्याशियों के पक्ष में मनाया जाएगा।  
विज्ञापन


वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस भी बागियों से परेशान हैं। नई टिहरी सीट पर पार्टी की अधिकृत प्रत्याशी अंबिका सजवाण के खिलाफ तीन-तीन बागी प्रत्याशी सीमा कृषाली, शकुंतला नेगी और विजयलक्ष्मी थलवाल ने निर्दलीय नामांकन करवाया है। मुनिकीरेती में अधिकृत प्रत्याशी दिनेश व्यास के खिलाफ वरिष्ठ नेता दिनेश भट्ट ने नामांकन करवाकर पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। घनसाली में अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ नागेंद्र सजवाण निर्दलीय चुनाव मैदान में है। लंबगांव में उमा बिष्ट और गंगा चौहान ने निर्दलीय नामांकन कर पार्टी नेताओं के माथे पर चिंता की लकीर खींच दी है। नरेंद्रनगर में नगर अध्यक्ष दिनेश उनियाल ने पार्टी से इस्तीफा देकर बगावत का झंडा बुलंद किया है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष सूरज राणा का कहना है कि बागी प्रत्याशियों से बातचीत चल रही है। 

विज्ञापन

टिकट वितरण के बाद बगावत आ रही सामने

रुड़की में भाजपा, कांग्रेस और बसपा के बागी निकाय चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों का समीकरण बिगाड़ सकते हैं। हालांकि, अभी इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन बगावत कर चुनावी मैदान में उतरे उम्मीदवारों से पार्टी प्रत्याशियों को नुकसान होना लाजिमी है। ऐसी स्थिति में तीनों पार्टियां बागी उम्मीदवारों से होने वाले नफे-नुकसान का आकलन करने में जुटी हैं।

निकाय चुनाव में भाजपा, कांग्रेस और बसपा तीनों पार्टियां टिकट वितरण के बाद बगावत का सामना कर रही हैं। ऐन वक्त पर टिकट कटने के कारण दावेदारों में असंतोष की स्थिति बनी हुई है। इसमें से कई तो दूसरे दलों या फिर निर्दलीय मैदान में भी उतर चुके हैं। झबरेड़ा नगर पंचायत की बात करें तो यहां अध्यक्ष पद के लिए भाजपा से दीपक सैनी टिकट के दावेदार थे, लेकिन भाजपा ने ऐन वक्त पर मानवेंद्र सिंह को प्रत्याशी घोषित कर दिया। माना जा रहा है कि मानवेंद्र सिंह का टिकट फाइनल कराने में विधायक देशराज कर्णवाल ने अहम भूमिका निभाई है। इसके कारण दो दिन पहले दीपक सैनी के समर्थकों ने विधायक के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए उन्हें उस रास्ते से नहीं गुजरने दिया, जिससे दीपक सैनी निकल रहे थे। इसके सबके बाद दीपक सैनी बसपा के सिंबल पर मैदान में है। 

यहां माना जा रहा है कि दीपक सैनी पार्टी प्रत्याशी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके साथ ही लक्सर में बसपा ने कई दावेदारों को दरकिनार कर अरुण सिंह को मैदान में उतारा है। यहां टिकट के दावेदार कर रहे देवेंद्र सिंह और प्रेम सिंह पुंडीर ने भी निर्दलीय ताल ठोकी है। यहां देवेंद्र सिंह, अरुण सिंह के लिए इस कारण भी नुकसानदायक साबित हो सकते है, क्योंकि देवेंद्र सिंह भी गुर्जर बिरादरी से संबंध रखते हैं। इसके अलावा मंगलौर से पूर्व विधायक सरवत करीम अंसारी अपने नजदीकी डॉक्टर शमशाद के लिए टिकट मांग रहे थे, लेकिन बसपा ने उनको दरकिनार कर जुल्फिकार अंसारी को टिकट दिया है। यहां भी डॉक्टर शमशाद के बगावती तेवर जुल्फिकार के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते है। हालांकि, देखने वाली बात यह होगी कि बागी किसको कितना नफा-नुकसान पहुंचाते हैं। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें