प्रसिद्ध भू-वैज्ञानिक और एमओईएस (मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ साइंस) के प्रधान अन्वेषक प्रो. चारूसी पंत का कहना है कि आज का ग्रेटर हिमालय कभी पृथ्वी से 20 किलोमीटर नीचे था। पहले यह सर्फेस पर आया और आज ग्रेटर हिमालय के रूप में स्थापित है।
उन्होंने बताया कि हिमालय प्रतिवर्ष एक सेमी की रफ्तार से ऊपर उठ रहा है। एमसीटी (मेन सेंटर थ्रस्ट) के दबाव से पैदा हुई ऊर्जा से आए भूकंप के बाद इसमें और वृद्धि हुई होगी। प्रो. पंत ने यहां हुई विशेष भेंट में बताया कि पाक अधिकृत नंगा पर्वत से अरुणाचल के नमचा बरवा क्षेत्र में एमसीटी गुजरती है।
मेन सेंट्रल थ्रस्ट के रूप में जानी जाने वाली यह दरार 2500 किलोमीटर लंबी है और कई भागों में विभाजित 50 से 60 किमी चौड़ी है। शनिवार को आया भूकंप भी एमसीटी जोन में था। उन्होंने बताया कि इंडियन और एशियन प्लेट के बीच दबाव, टकराने और घर्षण से भूकंप की घटना होती है।