फिल्म मेकर तिग्मांशु धूलिया की उत्तराखंड फिल्म बोर्ड उपाध्यक्ष पद पर ताजपोशी को कुछ भाजपाई उनके बड़े भाई हाईकोर्ट जस्टिस सुधांशु धूलिया के साथ जोड़ने की सियासत में जुट गए थे, इसलिए उन्होंने पद लेने से इंकार कर दिया।
यह खुलासा सोमवार को तिग्मांशु की मां सुमित्रा धूलिया से बातचीत में हुआ। गौरतलब है कि नैनीताल हाईकोर्ट में सीएम हरीश रावत से जुड़े स्टिंग प्रकरण की सुनवाई जस्टिस धूलिया की ही कोर्ट में चल रही है। तीन भाइयों में तिग्मांशु सबसे छोटे हैं।
सबसे बड़े भाई हिमांशु धूलिया और उनसे छोटे सुधांशु धूलिया हैं। मां सुमित्रा धूलिया ने अमर उजाला को बताया कि मुझे तो एक मां होने के चलते यही लालच था कि बेटा कुछ दिन उनके पास रहेगा तो उसे अपने हाथों का खाना खिला दूंगी। उन्हें कहा कि उत्तराखंड के लिए तिशू बहुत कुछ करना चाहता था, लेकिन दुख है कि कुछ सियासी लोगों की वजह से योजना धरातल पर नहीं उतर पाएगी।
उन्होंने बताया कि तिशू ने जैसे ही सुना कि उन्हें पद देने के एवज में उनके भाई जस्टिस धूलिया को उपकृत करने की सियासत की बात कही जा रही है, तो उन्होंने किसी की न सुनी और तुरंत पदभार लेने से इंकार कर दिया। वे बतातीं हैं कि तिशू ने बोर्ड उपाध्यक्ष पद ग्रहण नहीं करने का फैसला करने के बाद फोन पर यह बात बताई थी।
वे बताती हैं कि तिग्मांशु कुछ दिनों पहले दून आए थे। एक सप्ताह रहने के बाद 25 अगस्त को ही वह यहां से लौटे थे। इस बीच उनकी सीएम से मुलाकात हुई थी। बोर्ड उपाध्यक्ष बनाए जाने की उन्हें खुशी थी। जैसे ही वह दून से लौटे तो उन्हें बोर्ड का उपाध्यक्ष बना दिया गया।
तिशू की मां ने कहा कि कुछ भाजपाइयों ने आरोप लगा दिया कि भाई को उपकृत करने के लिए सरकार ने ऐसा किया है। सुमित्रा धूलिया ने बेटे के निर्णय को सही ठहराते हुए बताया कि इस छोटे से राज्य पर हावी राजनीति यहां का कभी विकास नहीं होने देगी। ऐसे तो आज तिशू ने मना किया है, कल दूसरे लोग भी करेंगे और कभी कोई प्रतिभा उत्तराखंड के विकास के लिए आगे आ ही नहीं पाएगी। इस ओछी राजनीति की तो जितनी भर्त्सना की जाए, वह कम है। यह राज्य के लिए शुभ संकेत नहीं है।