तहसील मुख्यालय से 20 किमी दूर स्थित सरपुड़ा बग्घा 54 गांव को गोद लेने के बाद भी सांसद भगत सिंह कोश्यारी अब तक न तो संपर्क सड़क को दुरुस्त करा सके हैं और न ही ग्रामीणों का पलायन थाम सके हैं।
सांसद के वादे के मुताबिक ग्रामीणों को उम्मीद थी कि गांव गोद लेने से सुरई वन रेंज से होकर जाने वाली सड़क पक्की हो जाएगी और बेटियों की शादियां जल्दी होंगी, लेकिन ग्रामीणों को अब भी जर्जर सड़क और आरक्षित वन नियमों से जूझना पड़ता है। मानसून पूर्व हुई बारिश से सांसद आदर्श ग्राम तक आने-जाने में दुश्वारियां बढ़ी हैं। हालांकि सांसद निधि से दस लाख की लागत से सीसी रोड बनने से ग्रामीणों को थोड़ी राहत मिली है।
सुरई वन रेंज में चारों ओर से घिरे बग्घा 54 गांव में यहां से आने-जाने के लिए दो मार्ग हैं। एक मार्ग सुरई होकर बग्घा जाने वाला 20 किमी मार्ग आरक्षित वन क्षेत्र से होकर जाता है। दूसरा मार्ग उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद के मझोला, न्यूरिया कालोनी से होकर बग्घा तक पहुंचता है, जो 42 किलोमीटर लंबा है। सुरई होकर जाने वाले मार्ग की तुलना में न्यूरिया कालोनी से होकर जाने वाला मार्ग अपेक्षाकृत ठीक है। सुरई होकर जाने वाले मार्ग इस पर बारिश और बड़े वाहनों के चलने से जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं।
आरक्षित वन का 15 किमी मार्ग तय करने में चार पहिया वाहन से डेढ़ घंटे का समय लगता है। यही वजह है कि सरकारी अधिकारी इस गांव को कालापानी कहा करते हैं। मनरेगा के तहत सुरई गेस्ट हाउस से आगे तीन किलोमीटर फारेस्ट रोड पर 54 लाख की लागत से आरबीएम डाला गया है, लेकिन इसमें भी जगह-जगह गड्ढे होने से मार्ग खराब हो गया है। गड्ढों की वजह से कई बार 108 नहीं पहुंच पाती। सबसे अधिक परेशानी गर्भवतियों को उठानी पड़ती है। ग्रामीणों ने अमर उजाला को बताया कि उनकी मुख्य समस्या जर्जर सड़क ही है। मार्ग की दयनीय हालत के कारण सरपुड़ा बग्घा के ज्यादातर लोग उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद का रुख करते हैं। वह अपनी फसल की बिक्री से लेकर रोजाना उपभोग की वस्तु उत्तर प्रदेश से ही लेते हैं।
बरसात से पहले फारेस्ट रोड का जीर्णोद्घार संभव नहीं
सांसद आदर्श ग्राम बग्घा 54 को जोड़ने तहसील मुख्यालय से जोड़ने वाली फारेस्ट रोड में गहरे गड्ढों को पाटने के लिए दो लाख का प्रस्ताव बनाकर विभाग को भेजा गया है। इस रोड का जीर्णोद्घार बरसात के बाद ही होना संभव है। फारेस्ट रोड को डामरीकरण का फिलहाल कोई प्रस्ताव यहां से नहीं भेजा गया है।
- आरके मौर्य, वन क्षेत्राधिकारी, सुरई वन रेंज