रावल ने बताया कि इसी परंपरा के तहत वर्ष 2016 में महाराष्ट्र के नांदेड़ में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में भी वे रूप छड़ी और मुकुट के साथ शामिल हुए थे। इसी क्रम में इस वर्ष भी पांच से 12 फरवरी तक नांदेड़ (महाराष्ट्र) में आयोजित शिव कथा और विश्व शांति यज्ञ कार्यक्रम में वे इन धार्मिक प्रतीकों के साथ सम्मिलित हुए थे।
उन्होंने कहा कि फरवरी माह में रूप छड़ी की विधिवत साधना की गई और बाद में इसे नियमानुसार जमा कर दिया गया है। इसलिए सोशल मीडिया में रूप छड़ी के गायब होने की जो बातें कही जा रही हैं, वे पूरी तरह निराधार और भ्रामक हैं।