दशहरा पर्व के अवसर पर रावण के पुतले को आग लगाने में राम के पसीने छूट गए। मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले पर आग नहीं लग पाई। बाद में पेट्रोल डालकर तीनों पुतलों में एक साथ आग लगाई गई।
नगर में दशहरे के अवसर पर रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले जलाए जाने थे। रामलीला मंचन के बाद जैसे ही पुतला दहन का समय आया, नरेंद्र क्लब में खड़े पुतले को आग लगाने के लिए राम गए, लेकिन रावण के पुतले ने आग नहीं पकड़ी।
राम के काफी प्रयास करने के बाद भी कोई असर नहीं हुआ। राम के साथ ही कमेटी से जुड़े लोग पुतलों में आग लगाने को आगे आए मगर पुतले से धुआं तक नहीं निकला।
इस दृश्य ने रामलीला कमेटी से जुड़े लोगों को परेशानी में डाल दिया। उसमें डीजल, पेट्रोल, मिट्टी तेल भी छिड़का गया लेकिन पुतले पर आग नहीं लगी।
बाद में थकहारकर लोगों ने तीनों पुतलों को जमीन पर गिरा दिया उनके बाद उन्हें तोड़ मरोड़ कर ढेर लगा आग लगाई गई। समिति से जुड़े लोगों का कहना है कि ठेकेदार ने पुतले के अंदर ज्वलनशील सामग्री डालना भूल गया। पाला गिरने से पुतले बहुत गीले हो गए थे जिससे उनमें आग नहीं लग सकी।