उसको पित्त की थैली निकालने की सलाह दी गई। मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के सर्जन डॉ. श्वेताभ प्रधान ने लेप्रोस्कोपी (दूरबीन) से पित्त की थैली निकालने का निर्णय लिया, लेकिन जब आपरेशन करते हुए कैमरे को पेट में डाला गया, तो मरीज के पेट में दोमुंही पित्त की थैली दिखाई दी। अल्ट्रासाउंड परीक्षण में यह नहीं दिखा था। लगभग एक घंटे के ऑपरेशन के बाद पित्त की थैली निकाल ली गई।
डॉ. प्रधान ने बताया कि दोमुंही पित्त की थैली बहुत कम मरीजों में होती है। दो मुंह होने के कारण इसको लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से निकालना मुश्किल होता है, लेकिन सर्जरी होने पर इसको सफलतापूर्वक निकाल लिया गया। उन्होंने बताया कि मरीज स्वस्थ है।