फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंड का ये अनोखा कबूतर बना अजूबा, खासियत देख वैज्ञानिक भी चौंके

Sat, 24 Dec 2016 01:51 PM IST
डॉ. प्रविंद्र कुमार/अमर उजाला, हरिद्वार
विज्ञापन
कबूतर की चोंच सामान्य से तीन गुनी लंबी है। - फोटो : AmarUjala
विज्ञापन
हरिद्वार के एक गांव जगजीतपुर में बाज जैसा दिखने वाला जंगली कबूतर अजूबा बना हुआ है। इसकी चोंच सामान्य जंगली कबूतर से तीन गुणा लंबी है, जिससे यह कबूतर आक्रामक नजर आता है। सामान्य से तीन गुणा लंबी चोंच होने के कारण इसको अपनी गर्दन तिरछी करके दाना चुगना पड़ता है। पक्षी वैज्ञानिक इस पर नजर रखे हुए हैं।
विज्ञापन


पक्षी वैज्ञानिकों के मुताबिक इसकी चोंच की लंबाई 4.5 सेंटीमीटर है, जबकि सामान्य जंगली कबूतर की चोंच 1.5 सेंटीमीटर तक लंबी होती है। यह कबूतर 5 मार्च 2016 को पहली बार कनखल से सटे गांव जगजीतपुर में देखा गया था।

गांव के पंडित सुधीर शर्मा ने इसकी जानकारी पक्षी वैज्ञानिक डॉ. विनय सेठी को दी। पक्षी वैज्ञानिकों ने बीते 11 मार्च को इस कबूतर को चिन्हित कर लिया और नाम दिया जुगनू।
विज्ञापन

पक्षी वैज्ञानिक रखे हैं कबूतर पर नजर

प्रदेश में पक्षियों की कई खास किस्में मौजूद हैं।
पक्षी वैज्ञानिक डॉ. विनय सेठी कहते हैं कि लंबी चोंच होने के बावजूद जुगनू दाना चुगने में सक्षम है। इसका व्यवहार भी अन्य कबूतरों की तरह सामान्य है और यह अपने समूह का महत्वपूर्ण सदस्य है।

गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय पक्षी वैज्ञानिक प्रो. दिनेश भट्ट और उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के पक्षी वैज्ञानिक डॉ. विनय सेठी इस कबूतर पर नजदीक से नजर रखे हुए हैं।

हालांकि वे कहते हैं कि इस कबूतर का व्यवहार अन्य कबूतरों की तरह ही सामान्य है। पक्षी वैज्ञानिकों ने दूर से ही दिखने वाले इस कबूतर को जुगनू नाम दिया है। गांव के बच्चों में भी जुगनू को लेकर उत्साह बना हुआ है। जब पक्षी वैज्ञानिक गांव पहुंचते हैं तो बच्चे जुगनू की तलाश कराने में वैज्ञानिकों की मदद करते हैं।
विज्ञापन

अनुवांशिक भी हो सकती है चोंच की असामान्य लंबाई

कबूतर को लेकर स्थानीय लोगों में उत्सुकता बनी हुई है। - फोटो : AmarUjala
गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार के अंतर्राष्ट्रीय पक्षी वैज्ञानिक प्रो. दिनेश भट्ट ने बताया कि चोंच की असामान्य लंबाई पर्यावरणीय या अनुवांशिक कारणों से हो सकती है। पर्यावरणीय कारणों में अंडा सेकते समय तापमान घटने-बढ़ने और मादा एवं बच्चे में हार्मोंस के असंतुलित होने पर भी ऐसे असामान्य लक्षण देखने को मिल सकते हैं।

दस माह से घोंसला नहीं बना पाया
पक्षी वैज्ञानिकों के मुताबिक जुगनू दस महीने से घोंसला नहीं बना पाया है। इसने एक बार नृत्य करते हुए मादा को रिझाने का प्रयास किया था। डॉ. विनय सेठी ने बताया कि जुगनू के प्रजनन काल पर नजर रखी जा रही है। देखना यह है कि प्रजनन काल के दौरान इसका व्यवहार कैसा है। वह अपने चूजों का लालन-पालन और क्षेत्र की सुरक्षा कैसे करता है?
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें