इस फूल की खोज करने वाले रेंज अधिकारी हरीश नेगी ओर रिसर्च फेलो मनोज सिंह को ट्रेकिंग का जुनून है। दोनों ही सतोपंथ के ट्रेक पर थे और एक गुफा के पास उन्हें यह फूल नजर आया। मुख्य मार्ग से अलग यह जगह आकर्षक थी। मनोज सिंह टेक्सोनॉमी के विशेषज्ञ हैं। फूल कुछ अलग दिखा तो सैंपल लिया गया और बात आगे बढ़ी।
अब साबित हो गया है कि यह फूल पहली बार उत्तराखंड में देखा गया है। वन अनुसंधान केंद्र इसका अध्ययन करेगा और इसके संरक्षण के लिए काम करेगा।
- संजीव चतुर्वेदी, मुख्य वन संरक्षक वन अनुसंधान केंद्र
यह फूल 100 साल पहले सिक्किम में देखा गया था। नेपाल और चीन में भी यह रिपोर्ट किया गया। इस खोज को व्यापक सराहना मिलने से मन में खुशी है और काम करने का उत्साह दोगुना हो गया है।
- मनोज सिंह, जेआरएफ
सतोपंथ का यह ट्रेक खास लोकप्रिय नहीं है। कम ही वनस्पति विज्ञानी इस ओर रुख करते हैं। ट्रेक का शौक और पेड़ पौधों को परखना अच्छा लगता है, यही काम आया।
-हरीश नेगी, रेंजर