बेहद सुंदर दिखती है। यह लूना मॉथ जापान, बांग्लादेश, नेपाल में भी पाई जाती है। रश्मि ने बताया कि यह मॉथ सेब, बुरांश के बीजों, फलों को नष्ट कर देती है। इसलिए इसे हानिकारक प्रजाति माना जाता है, हालांकि इस मॉथ की कम संख्या, सीमित अवधि का ठहराव प्राकृतिक नियंत्रण के हिसाब से पौधों के लिए लाभदायक भी हो सकता है।
पर्यटन सीजन में इन क्षेत्रों में होती है बर्ड वाचिंग
सातताल, भीमताल, नौकुचियाताल, जून स्टेट, पंगोट में मार्च से जून तक देशी, विदेशी सैलानी पक्षी देखने पहुंचते हैं लेकिन कुछ सालों से पेड़ों के कटान, निर्माण होना, जीवों को मारने से देशी-विदेशी जीवों का आना कम हो गया है। पक्षी प्रेमी डॉ. आशीष बिष्ट बताते हैं कि इन क्षेत्रों में कुछ सालों तक देश-विदेश की चिड़िया आती थी, लेकिन अब इनकी संख्या बेहद कम हो चुकी है, जो चिंता का विषय है।