सड़क पर खाकी वर्दी ना दिखे
सुरेंद्र कुकरेती बताते हैं कि जब आंदोलनकारी रामपुर तिराहा से लौटे तो उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश) में कर्फ्यू लग चुका था। आंदोलनकारियों के आक्रोश को देखते हुए उन्हें कही पर भी पुलिस रोकने की हिम्मत नहीं जुटा सकी। देहरादून घंटाघर पर कर्फ्यू के बीच प्रदर्शन करने के बाद वे विकासनगर पहुंचे। उन्होंने बताया कि विकासनगर में भी विरोध में रैली निकाली गई। बाकायदा अलाउंसमेंट कराया गया कि कोई भी खाकी वर्दी पहने ना दिखे। तब पुलिस को लेकर लोगों में खूब आक्रोश था। हर जनमानस का खून खौल रहा था।
दिल्ली नहीं पहुंच सकी गढ़वाल मंडल की बसें
सुरेंद्र कुकरेती बतातें है कि रामपुर तिराहा कांड की वजह से गढ़वाल मंडल की बसें दिल्ली नहीं पहुंच पाई, जबकि कुमाऊं मंडल से 160 बसें दिल्ली पहुंची थीं। रैली को सफल बनाने के लिए अन्य राज्यों से भी उत्तराखंड मूल के लोग हजारों की संख्या में दिल्ली पहुंच चुके थे। आठ बसें विकासनगर से भी गई थीं।