रामलीला मंचन में लोगों का रुझान पहले से घटता जा रहा है। फिर चाहे वह अभिनय करने वाले हों या तबला व अन्य वाद्य यंत्र बजाने वाले कलाकार। इसका एक उदाहरण पुराना राजपुर में हो रही रामलीला में देखने को मिला। यहां हारमोनियम वादक की व्यवस्था न होने से 27 साल पुरानी राम-लक्ष्मण की जोड़ी तोड़नी पड़ी। लक्ष्मण बनने वाले कलाकार को ही हारमोनियम बजाने की जिम्मेदारी दी गई। जबकि उनका बड़ा भाई इस बार भी राम की भूमिका निभा रहा है।
श्री आदर्श रामलीला सभा राजपुर इस साल 70वीं बार रामलीला मंचन करा रही है। रायपुर के भड़ासी गांव निवासी अमीचंद 54 वर्ष से इस सभा के साथ जुड़े हुए हैं। 1965 से 1984 तक अमीचंद भारती ने रावण का किरदार निभाया, लेकिन इसके बाद उन्होंने हारमोनियम बजाने की जिम्मेदारी थाम ली। इसके बाद 1993 से अमीचंद के दो बेटे उपदेश चंद और गणेश चंद राम-लक्ष्मण की भूमिका निभाने लगे। बड़ा बेटा उपदेश राम तो छोटा बेटा गणेश लक्ष्मण का किरदार निभाता आ रहा था।
मगर, इस बार अमीचंद हारमोनियम बजाने नहीं आ सके और सभा के सामने यह संकट आ खड़ा हुआ कि हारमोनियम वादक कहां से लाया जाए? प्रोफेशनल लोगों से भी बात की, लेकिन इस बार कोई तैयार नहीं हुआ। इस पर गणेश चंद जो कि हारमोनियम बजाना अच्छी तरह जानते हैं, उनको यह जिम्मेदारी दी गई। अब गणेश हारमोनियम बजा रहे हैं, ऐसे में वे अपने बड़े भाई उपदेश के साथ अभिनय नहीं कर सके।
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