हिंदी की प्रसिद्ध साहित्यिक पत्रिका हंस के अप्रैल अंक में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की कहानी छपी है।
कहानी में प्रकाशित निशंक के परिचय में उन्हें उत्तराखंड का वर्तमान मुख्यमंत्री बताया गया है। हालांकि हंस के संपादक का कहना है कि यह चूक है।
अगले अंक में भूल सुधार प्रकाशित किया जाएगा लेकिन सवाल यह है कि एक गंभीर साहित्यिक पत्रिका ऐसी तथ्यात्मक भूल कैसे कर सकती है?
बता दें कि सितंबर 2011 को ही रमेश पोखरियाल निशंक को सीएम पद से हटाकर भाजपा ने बीसी खंडूड़ी को मुख्यमंत्री बनाया था। उसके बाद प्रदेश में विधानसभा का चुनाव हुआ और कांग्रेस की सरकार बनी।
संपादकीय चूक
कांग्रेस ने भी पहले विजय बहुगुणा को मुख्यमंत्री बनाया। उसके बाद लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बहुगुणा को हटाकर हरीश रावत को मुख्यमंत्री बना दिया है। इस तरह निशंक के बाद उत्तराखंड को तीन मुख्यमंत्री मिल चुके हैं।
इस बारे में पड़ताल करने पर मालूम चला कि निशंक ने हंस को कहानी तब भेजी थी जब वह उत्तराखंड के मुख्यमंत्री थे। उस समय हंस के संपादक राजेंद्र यादव थे।
उन्होंने कहानी को प्रकाशित करने के लिए चुन लिया, लेकिन पिछले दिनों उनका देहांत हो गया। उसके बाद पत्रिका के प्रकाशन की जिम्मेदारी दूसरे लोगों पर आ गई।
इस बारे में पत्रिका के संपादक संजय सहाय का कहना है कि यह संपादकीय चूक है। कहानी प्रकाशित करते समय इस तथ्य को सुधार लेना चाहिए था। बताया कि अब पत्रिका के अगले अंक में भूल सुधार प्रकाशित किया जाएगा।