हाथी की चिंग्घाड़, कौओं की कांव-कांव और शेर की दहाड़ की हूबहू आवाज निकालने वाले पर्यावरण प्रेमी रामबाबू जंगली नहीं रहे। बुधवार सुबह सरकारी अस्पताल में उपचार के दौरान उन्होंने अपने जीवन की अंतिम सांस ली। 46 वर्षीय जंगली पिछले काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे।
मूलरूप से कोटद्वार के हल्दूखाता, पाला गंज, कलालघाटी निवासी रामबाबू जंगली पिछले एक महीने से श्यामपुर में किराये के मकान में रह रहे थे। वह यहां वन्य जीव- जंतुओं और पर्यावरण संरक्षण के लिए आसपास के स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को जागरूक कर रहे थे।
बताया जा रहा है कि बीते मंगलवार की रात अचानक तबियत बिगड़ने पर उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां बुधवार सुबह उनकी मौत हो गई। दोपहर बाद रामबाबू जंगली के परिजन अस्पताल पहुंचे और शव लेकर चले गए। इस दौरान नायब तहसीलदार डीडी वर्मा ने गांव तक शव ले जाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था की।
परिवार में बड़े थे ‘जंगली’
पर्यावरण प्रेमी रामबाबू जंगली तीन भाइयों और एक बहन में सबसे बड़े थे। भाई राजपाल, भोपाल और बहन की शादी हो चुकी है, लेकिन जंगली अविवाहित थे। रामबाबू जंगली की मौत से परिजन स्तब्ध हैं। बताया कि वह पिछले तीन साल से अस्वस्थ चल रहे थे।
राज्य पक्षी मोनाल को बचाने की अलख जगाई
पर्यावरण प्रेमी रामबाबू जंगली वैसे तो वन्य जीव- जंतु और पर्यावरण संरक्षण पर लोगों को जागरूक करते थे, लेकिन विलुप्त हो रहे राज्य पक्षी मोनाल को संरक्षित करने के लिए हमेशा आवाज उठाते रहे। बीते दो दिसंबर को तहसील दिवस पर भी उन्होंने एसडीएम की मौजूदगी में लोगों से मोनाल को बचाने के लिए आगे आने का आह्वान किया था। वह इन दिनों मैदान और पहाड़ों में सड़कों के विस्तारीकरण के लिए काटे जा रहे पेड़ों की एवज में वृहद स्तर पर पौधरोपण कराने की मुहिम चला रहे थे।
सरकार से लगाई थी गुहार
जंगली काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उन्होंने इसके लिए राज्य सरकार से भी अपने संपूर्ण उपचार के लिए आर्थिक मदद की गुहार लगाई थी।