संपत्ति नामांतरण में अनियमितता के मामले में पूर्व संपत्ति अधिकारी के निलंबन का मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि नगर निगम में एक और गंभीर प्रकरण सामने आ गया। हाईकोर्ट में लंबित रामनगर स्थित एक संपत्ति के नामांतरण में निर्धारित प्रक्रिया की अनदेखी कर नाम दर्ज किए जाने के मामले में नगर आयुक्त ने सात अधिकारियों-कर्मचारियों समेत कर अनुभाग से जुड़े कर्मचारियों से तीन दिन में स्पष्टीकरण तलब किया है। संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलने पर विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
मामला रामनगर स्थित संपत्ति संख्या 988/2 से जुड़ा है। नगर आयुक्त की ओर से जारी नोटिस के अनुसार रमन आहुजा ने 15 जून 2016 के विक्रय पत्र के माध्यम से 3,280 वर्ग फुट भूमि खरीदी थी। नामांतरण पत्रावली में आपत्ति प्राप्त होने के बाद इसे 17 जून 2024 को नगर आयुक्त के समक्ष भेजा गया था। आरोप है कि मामले को सुनवाई के लिए सक्षम स्तर पर भेजने के बजाय अपने स्तर पर ही लंबित रखा गया।
नोटिस के अनुसार 10 सितंबर 2026 को मामला संज्ञान में आने पर पता चला कि उक्त नामांतरण आदेश को कर निर्धारण पंजिका वर्ष 2025-29 के पृष्ठ संख्या 40 पर दर्ज कर दिया गया है। जबकि प्रकरण हाईकोर्ट में लंबित होने के साथ नगर आयुक्त स्तर पर भी सुनवाई के लिए लंबित था और मामले की जांच के लिए कमेटी भी गठित की गई थी। ऐसे में निर्धारित प्रक्रिया के बिना संपत्ति को कर निर्धारण पंजिका में दर्ज किए जाने पर नगर निगम प्रशासन ने गंभीर आपत्ति जताई है।
नगर आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों से पूछा कि सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति अथवा संज्ञान के बिना किस नियम या प्रावधान के तहत नामांतरण पत्रावली में नाम परिवर्तन किया गया। नोटिस में इस कृत्य को दायित्वों में गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता बताते हुए विभागीय नियमों एवं सरकारी प्रक्रिया का उल्लंघन माना गया है।
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इनसे तलब किया स्पष्टीकरण
नगर आयुक्त ने कर निर्धारण एवं राजस्व अधिकारी, कर अधीक्षक, रिकार्ड अनुभाग प्रभारी, कर अनुभाग प्रभारी, टोल मोहर्रिर, समस्त कर संग्रहकर्ताओं और समस्त आउटसोर्स कर्मी, कर अनुभाग के आउटसोर्स कर्मियों को नोटिस जारी किया है।