बैठक में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण संत महापुरुषों के सानिध्य में 2019 तक शुरू हो जाएगा। सभी धर्माचार्यों को साथ लेकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद शीघ्र अपनी ओर से इस कार्य की शुरूआत करेगा।
उन्होंने कहा कि श्रीरामलला से देश के करोड़ों हिंदुओं की आस्था जुड़ी हुई है। कुछ धर्म के ठेकेदार राम मंदिर निर्माण को लेकर अपनी राजनीति चमकाने में लगे हुए हैं। जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने आर्ट आफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर के बयानों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वह किस अखाड़े के साधु हैं और किस संप्रदाय से संबंध रखते हैं। उन्हें श्रीराम मंदिर निर्माण को लेकर बयानबाजी करने का अधिकार सरकार या विहिप किसने दिया है। उन्होंने कहा कि श्री श्री रविशंकर का अखाड़ा परिषद, विश्व हिंदू परिषद, निर्मोही अखाड़े से कोई संबंध है। यदि है तो वह देश की जनता के समक्ष यह राज खोलें।
अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने कहा कि वक्फ बोर्ड अध्यक्ष वसीम रिजवी के बारे में श्रीश्री रविशंकर ने गलत बयानबाजी की है, उसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वसीम रिजवी राम मंदिर निर्माण के पक्षधर हैं।
उन्होंने कहा कि 16 मार्च को प्रयाग में बागम्बरी गद्दी पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होने जा रही है, जिसमें सभी 13 अखाड़े भाग लेंगे। बैठक का मुख्य मुद्दा 2019 का अर्द्धकुंभ मेला और श्रीराम लला के मंदिर निर्माण का होगा।
निर्मोही अणि अखाड़े के श्रीमहंत राजेंद्रदास ने कहा कि निर्मोही अखाड़े के बारे में जो अयोध्या में बैठकर बयानबाजी कर रहे हैं वह फर्जी हैं और फर्जीवाड़े का खुलासा 16 मार्च को अखाड़ा परिषद की बैठक में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि श्रीश्री रविशंकर धन बल के बल पर कुछ साधु संतों को बरगला रहे हैं जो बिल्कुल गलत है।
बैठक में श्रीमहंत धर्मदास, आनंद पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद, निर्मल अखाड़े के सचिव महंत बलवंत सिंह, श्री पंचायती नया उदासीन अखाड़े के मुखिया महंत भगतराम आदि ने भी विचार रखे।
बैठक में गुजरात जगन्नाथ मंदिर से आए महंत दलीपदास, महंत हनुमानदास, महंत नंदरामदास, महंत राम सुखदेवदास, श्रीमहंत जगदीश गिरि, महंत कालू गिरि, स्वामी आशुतोष पुरी, महंत आनंद वन महाराज, महंत लक्ष्मण भारती, महंत डोगर गिरि, महंत रविंद्र पुरी, महंत रामलखन गिरि, महंत रामरतन गिरि आदि मौजूद थे।