सरकार को फ्लोर पर बचा लेने में कामयाब रहे उत्तराखंड सीएम हरीश रावत के लिए राज्यसभा चुनाव अगला फ्लोर टेस्ट है, जिसमें इस बार समीकरण पूरी तरह से अलग दिख रहे हैं।
18 मार्च से 10 मई तक जिस प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट (पीडीएफ) को सीएम साधे रखने में कामयाब रहे वह इस बार फ्लोर पर उतरने से पहले अलग राह पर बढ़ रही है। पीडीएफ के सभी छह विधायकों के एकजुट होकर राज्यसभा में अपनी दावेदारी देने के साथ यशपाल आर्य की खुलकर सामने आई नाराजगी साफ करती है कि इस बार संकट के बादल गहरे काले हैं।
भाजपा कांग्रेस के सदस्यों की क्रास वोटिंग से अधिक चिंता पीडीएफ की है। वहीं, भाजपा की सीनियर लीडरशिप सोमवार को पहुंच रही है, जिसके बाद उनकी रणनीति से भी कांग्रेस को जूझना होगा।
राज्यसभा चुनाव से पहले हर दिन बदलते सियासी घटनाक्रम ने सीएम हरीश रावत और कांग्रेस के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। कांग्रेस से पहले ही नौ विधायक बागी होकर भाजपा का दामन थाम चुके हैं, जिनकी सदस्यता सदन से समाप्त होकर अब कोर्ट में विचाराधीन है। राज्यसभा चुनाव में उनकी गैरमौजूदगी कांग्रेस के लिए फायदेमंद है।
धनै अगर नामांकन भरते हैं तो सीएम के लिए दिक्कतें बढ़ जाएंगी
हरीश रावत
- फोटो : pti
कांग्रेस विधायक रेखा आर्या भी एक तरह से भाजपा के साथ हैं, जिनके चुनाव में रहने के नुकसान से बचने के लिए उनकी दल बदल कानून के तहत सदस्यता समाप्त करने की याचिका विधानसभा अध्यक्ष के पास सुरक्षित है। लेकिन, पीडीएफ का राज्यसभा चुनाव को लेकर स्टैंड समीकरण बिगाड़ रहा है। कांग्रेस के पास खुद के 27 विधायक हैं जबकि भाजपा के पास 28 विधायक हैं।
भाजपा विधायक भीमलाल कांग्रेस के पक्ष में क्रास वोटिंग कर सकते हैं तो रेखा भाजपा के लिए क्रास वोट कर सकती हैं। इस स्थिति में पूरी तरह से पीडीएफ मुख्य रोल में रहेगी। कांग्रेस के साथ चार वर्ष से गठबंधन में चल रहे पीडीएफ पहली बार इस कदर मुखर हुई है। पीडीएफ से धनै अगर नामांकन भरते हैं तो सीएम के लिए दिक्कतें बढ़ जाएंगी।
प्रदीप टम्टा को प्रत्याशी घोषित कर यशपाल आर्य का नाराज होना पार्टी में असंतोष का बड़ा संकेत है। हालांकि यशपाल इससे पहले भी नाराजगी दिखाते रहे हैं, लेकिन आखिरी मौके पर उन्हें मना लिया जाता रहा है।
वहीं भाजपा वेट एंड वॉच की स्थिति में दिख रही है। पीडीएफ ने जिस तरह सीएम पर उनकी अनदेखी का आरोप जड़ते हुए रविवार को भी चुनाव में उतरने का फैसला कायम रखा उसे भाजपा भुना सकती है। ऐसे में भाजपा अंतिम मौके पर अपने पत्ते खोलेगी।
विधानसभा में दलीय स्थिति
कांग्रेस - 27
भाजपा - 28
पीडीएफ - 1 उक्रांद, दो बसपा, चार निर्दलीय