राजाजी टाइगर रिजर्व की सीमा से लगे गांव के लोगों को देश के विभिन्न टाइगर रिजर्व में भेजा जाएगा। जहां ग्रामीण रोजगार पाने के विभिन्न प्रयोगों को सीखकर स्वावलंबी बन सकेंगे। साथ ही स्थानीय लोगों के हैंडीक्राफ्ट को भी राजाजी टाइगर रिजर्व बढ़ावा देगा और फसलों में भी बदलाव लाया जा रहा है।
राजाजी टाइगर रिजर्व के समीप रहने वाले ग्रामीणों के सामने रोजगार सबसे बड़ी समस्या है। पार्क के समीप रोजगार के पर्याप्त साधन न होने के कारण इन ग्रामीणों को रोजी रोटी के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वहीं जानवरों की ओर से फसल बर्बाद करने से समस्या और भी ज्यादा बढ़ जाती है। अब राजाजी टाइगर रिजर्व इन ग्रामीणों की आर्थिकी सुधारने की योजना बना रहा है।
ग्रामीणों को देश के विभिन्न टाइगर रिजर्व में भेजा जाएगा। जहां जाकर ग्रामीण यह देखेंगे कि किस प्रकार टाइगर रिजर्व के समीप के लोग रोजगार के साधन को विकसित कर रहे हैं। रोजगार पाने के उनके साधनों को फिर हरिद्वार में लागू किया जाएगा। इसके अलावा स्थानीय प्रतिभाओं के माध्यम से भी रोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा। जिसके तहत 84 कुटिया और चीला रेंज में हैंडीक्राफ्ट की एक एक दुकान खोली जाएगी। यहां स्थानीय लोगों की ओर से बनाए गए हैंडीक्राफ्ट उत्पादों को बेचा जएगा।
फसलों के किया जाएगा बदलाव
राजाजी टाइगर रिजर्व ग्रामीण इलाकों में फसल चक्र बदलने की योजना भी बना रहा है। जिसके अभी गोल लाल मिर्च लगाने की योजना भी बनाई जा रही है। मिर्च की फसल को जानवर नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। मशरूम उत्पादन में भी काम किया जा रहा है। इसके लिए ग्रामीणों को ट्रेनिंग देने की योजना भी बनाई गई है।
ग्रामीणों की ओर से तैयार हैंडीक्राफ्ट को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए चीला और 84 कुटिया में विभाग द्वारा हैंडीक्राफ्ट की एक एक दुकान खोली जाएगी। रोजगार के नए साधनों को सीखने के लिए देश के अन्य टाइगर रिजर्व में भी ग्रामीणों को भेजे जाने की योजना है।
- सनातन सोनकर, निदेशक, राजाजी टाइगर रिजर्व