100 किमी प्रति घंटे करने संबंधी फैसले पर रेलवे प्रशासन बैकफुट पर
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राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में ट्रेनों की गति बढ़ाकर 100 किमी प्रति घंटे करने संबंधी फैसले पर रेलवे प्रशासन बैकफुट पर आ गया है। टाइगर रिजर्व प्रशासन के विरोध के बाद गति को 35 किलोमीटर प्रति घंटे रखने का निर्णय लिया गया है। मंडल रेल प्रबंधक ने इस संबंध में दिशानिर्देश भी जारी कर दिए हैं।
पिछले दिनों रेल संरक्षा आयुक्त रायवाला से ऋषिकेश और देहरादून से हरिद्वार रेलखंड में ट्रेनों की गति बढ़ाकर 100 किलोमीटर प्रति घंटे करने का आदेश जारी किया था। वन्यजीवों की सुरक्षा के मद्देनजर राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन ने इसका विरोध किया था। टाइगर रिजर्व के निदेशक डीके सिंह ने इस संबंध में मंडल रेल प्रबंधक को पत्र भी लिखा था।
उन्होंने कहा कि था टाइगर रिजर्व में ट्रेनों की गति बढ़ाने से वन्यजीव हादसे का शिकार हो सकते हैं। उन्होंने कहा था कि कोरोना संकट के चलते ट्रेनों का संचालन बहुत कम हो रहा है। ऐसे में रेलवे ट्रैक पर वन्यजीवों की आवाजाही बढ़ गई है। उन्होंने ट्रेनों की गति को 35 किमी प्रति घंटे रखने का अनुरोध किया था।
मंडल रेल प्रबंधक तरुण प्रकाश का कहना है कि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में ट्रेनों को 35 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से ही संचालित किया जाएगा। हरिद्वार-देहरादून रेलखंड पर टाइगर रिजर्व के 18 किलोमीटर क्षेत्र में ट्रेनों की गति पर नियंत्रण रहेगा जबकि टाइगर रिजर्व क्षेत्र के बाहर ट्रेन की गति 100 किलोमीटर प्रति घंटे होगी।
हरिद्वार और देहरादून के बीच राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में ट्रेनों की गति को लेकर गतिरोध पैदा हो गया था। एक ओर रेलवे ने इस क्षेत्र में 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार की अनुमति दे दी। वहीं, टाइगर रिजर्व प्रशासन वन्यजीवों की सुरक्षा का हवाला देते हुए इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई। निदेशक डीके सिंह ने मंडल रेल प्रबंधक को लिखे गए पत्र में ट्रेनों की गति को 30 किलोमीटर प्रति घंटा रखने के लिए कहा था।