पछवादून व जौनसार बावर में हुई बारिश व बर्फबारी से क्षेत्र के किसानों ने राहत की सांस ली है। बारिश से मैदानी क्षेत्रों में गेहूं की फसल व पहाड़ी इलाकों में फल व सब्जियों की फसलों को लाभ मिलने की बात कृषि वैज्ञानिकों ने कही है। उनका कहना है कि मौजूदा बारिश से जहां फसलों की सिंचाई का लाभ मिलेगा वहीं सूखे के कारण लगने वाले रोग से भी निजात मिल जाएगी।
पछवादून के विकासनगर, सहसपुर, सेलाकुई आदि क्षेत्रों में इन दिनों गेहूं की फसल की बुवाई की गई है। बारिश से फसल को लाभ मिलने की उम्मीद है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार ने बताया कि अधिकतर खेतों में गेहूं की फसल अंकुरित हो चुकी है। सूखे मौसम में पाला अधिक पड़ता है जिससे अंकुरित हो रहे पौधों में सड़न रोग लगने की आशंका प्रबल हो जाती है। हालांकि बारिश अभी कम हुई है। लेकिन, इससे पाला व सड़न रोग लगने से फसलों का बचाव हो जाएगा।
उधर, जौनसार बावर के साहिया में टमाटर, लहसुन, मटर आदि की खेती व्यापक स्तर पर की जाती है। क्षेत्र के किसान सुरेंद्र सिंह, बलबीर सिंह, अशोक ने बताया कि क्षेत्र में सब्जी उत्पादन की दृष्टि से बारिश की अत्यधिक आवश्यकता थी। हालांकि अभी पर्याप्त मात्रा में खेतों को पानी नहीं मिला है लेकिन फिलहाल के लिए यह स्थिति किसानों को थोड़ी राहत जरूर दे रही है।
चकराता व त्यूणी क्षेत्र में सब्जियों के साथ दलहन व फलों का उत्पादन किया जाता है। जिसमें सेब क्षेत्र की प्रमुख फसल है। क्षेत्र में हुई बर्फबारी से सेब उत्पादक किसानों के चेहरे खिल गए हैं। क्षेत्र में आमतौर पर दिसंबर के दूसरे या चौथे सप्ताह तक बर्फबारी होती है लेकिन इस बार पहले सप्ताह में ही बर्फबारी से किसानों को आने वाले समय में अधिक बर्फबारी की उम्मीद है। फल व उद्यान विशेषज्ञ व कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी के प्रभारी डॉ. एके शर्मा ने बताया कि सब्जी व फल उत्पादन के लिए यह बारिश और बर्फबारी काफी लाभदायक साबित होगी। बारिश से फसलों को पानी तो मिलेगा ही साथ ही उनमें लगने वाले रोगों की समस्या भी नहीं आएगी।