पश्चिमी विक्षोभ के असर की वजह से अप्रैल के पहले पखवाड़े में हर दूसरे दिन सावन जैसी बारिश हो रही है।
इससे जहां गेहूं आदि फसलों को भारी नुकसान हो रहा है, वहीं गर्मी भी अपनी धमक नहीं दिखा पा रही है। मौसम विभाग का कहना है कि अप्रैल के पहले पखवाड़े में 17 साल बाद मौसम का ऐसा रंग देखने को मिला है।
मौसम विभाग का कहना है कि इस साल अब तक 67 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई है, जबकि इससे पहले वर्ष 1998 में अप्रैल के पहले पखवाड़े में 79 मिलीमीटर बारिश हुई थी। वर्ष 1983 में अप्रैल के पहले पखवाड़े में सर्वाधिक 106 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई थी।
इस साल अप्रैल की शुरुआत में ही बारिश गर्मी के ऊपर है। एक दो दिन सूरज की तपिश से पारा चढ़ता है तो दूसरे दिन बादल धमक पड़ते हैं। अप्रैल के पहले पखवाड़े में अभी तक पारे में जबर्दस्त उतार चढ़ाव देखने को मिला है।
मौसम विभाग के निदेशक आनंद शर्मा के मुताबिक इसके पीछे कोई ठोस कारण तो नहीं है, लेकिन अचानक पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने और स्थानीय कारकों के प्रभाव की वजह से बारिश और बर्फबारी हो रही है।
बर्फबारी ने भी छुआ नया आयाम
बारिश के अलावा बर्फबारी ने भी लंबे समय बाद इतने लंबे समय तक असर दिखाया है।
मौसम विभाग के मुताबिक इस साल उच्च पहाड़ी इलाकों में अप्रैल के पहले पखवाड़े में 10 सेंटीमीटर तक बर्फ पड़ी है। इससे पहले साल 1998 में ऐसी बर्फबारी देखने को मिली थी। आमतौर पर अप्रैल माह में अपेक्षाकृत कम बर्फबारी होती है।
वर्षवार अप्रैल में पारे की स्थिति
तिथि - 2011 - 2012 - 2013 - 2014 - 2015
1 अप्रैल - 29.6 - 33.3 - 29.8 - 28.8 - 27.1
5 अप्रैल - 30.1 - 35.3 - 29.4 - 30.3 - 28.8
10 अप्रैल - 32.2 - 34.5 - 34.9 - 29.8 - 29.5
15 अप्रैल - 31.3 - 25 - 32.2 - 31.1 - 29.1
16 अप्रैल - 25 - 29.1 - 31.8 - 32.8 - 30.4