पहाड़ों की रानी मसूरी में रविवार पूरे दिन रिमझिम बारिश का सिलसिला चलता रहा।
समूची पर्यटन नगरी कोहरे और धुंध के आगोश में समा गई। बारिश से पारा शून्य के आसपास मंडराता रहा। कई बार तापमान शून्य से भी नीचे चला गया। नगर में बर्फवारी की संभावना को देखते हुए सैलानियों ने रूख किया। मगर देर शाम तक भी बर्फवारी नहीं हुई।
अलबत्ता रविवार को तड़के भारी ओलावृष्टि से घरों की छत पर ओले की परत जम गई। उधर दूसरी और सुरकंडा देवी मंदिर और नागटिब्बा की पहाड़ियों में हल्की बर्फवारी के समाचार मिले हैं।
नगर में इस बार दिसंबर से लेकर जनवरी का पूरा महीने बारिश न होने से आगामी पर्यटक सीजन के लिए पानी की दिक्कत बढ़ाना लाजमी थी। लेकिन रविवार को बारिश से पानी के स्त्रोत सूखने से बच गए। लंबे समय से लोग बारिश का इंतजार कर रहे थे।
बारिश न होने से वाइरल फीवर समेत अनेक बीमारियां घर करने लगी थी। बारिश से आसपास के किसानों की फसल पूरी बर्वाद होने से बच गई। नगर में सुबह से लेकर रात तक बारिश होती रही।
पारा गिरने से ठंड का प्रकोप बढ़ गया। जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ। बाजारों में अन्य दिनों की अपेक्षा कम रौनक दिखाई दी। ठंड से बचने के लिए स्थानीय लोग अपने घरों की चारदीवारी में कैद हो गए।
जबकि मेहनतकश मजदूर तबके की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। बारिश और ठंड का प्रकोप बढ़ने से हिमपात की संभावना बलवति हो गई है। बारिश के चलते बाजार और सड़कों पर वाहन भी कम दौड़े।