लंबे विचार विमर्श के बाद जूना अखाड़े के संरक्षक श्रीमहंत हरि गिरि और जूना पीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरि ने राधे मां से महामंडलेश्वर पद मिलने के दो दिन बाद वह पद वापस ले लिया था।
जांच के लिए महामंडलेश्वर स्वामी पंचदेवानंद गिरि की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया था। उधर पायलट बाबा और महामंडलेश्वर अर्जुन पुरी को वर्ष 2013 के प्रयाग कुंभ में निलंबित किया गया था।
उन पर आरोप था कि उन्होंने सर्वोच्च अखाड़ों के समकक्ष महामंडलेश्वर परिषद का गठन कर लिया है। अखाड़ों के संविधान के अनुसार ऐसा करना अनुचित है। उस समय पायलट बाबा के साथ परिषद में शामिल किसी भी महामंडलेश्वर को कुंभ स्नान नहीं करने दिया गया था।
बाद में खेद प्रकट करने के बाद पायलट बाबा ने महामंडलेश्वर परिषद भंग कर दी थी। उसके बाद पायलट बाबा और अर्जुन पुरी को फिर से अखाड़े के साथ लेने की घोषणा की गई थी।
जूना अखाड़े के राष्ट्रीय प्रवक्ता महंत विद्यानंद सरस्वती ने बताया कि जांच कमेटी की रिपोर्ट में राधे मां के खिलाफ कोई भी आरोप नहीं पाया गया। इसलिए उनका निलंबन वापस ले लिया गया है। राधे मां अब जूना अखाड़े की महामंडलेश्वर हैं और आगामी अर्द्धकुंभ में अखाड़े के साथ शाही स्नान करेंगी।
इसी प्रकार पायलट बाबा भी अब अखाड़े के महामंडलेश्वर बने रहेंगे। उनके साथ भंग की गई महामंडलेश्वर परिषद में जो भी महामंडलेश्वर शामिल थे, वह भी अपने अखाड़ों के साथ कुंभ स्नान करेंगे। श्रीमहंत विद्यानंद सरस्वती ने कहा कि यह विवाद अब समाप्त हो गया है।