राज्पाल डॉ. अजीज कुरैशी तय समय (शाम 4.00 बजे) से दो मिनट पहले यानी 3:58 मिनट पर राजभवन के गेट नंबर-दो से बाहर हुए। मनोनीत राज्यपाल डा. कृष्ण कांत पॉल ने तय समय से दो मिनट देरी से यानी 4:02 मिनट पर राजभवन के गेट नंबर-1 से प्रवेश किया।
कुरैशी काली गाड़ी में पांच वाहनों के काफिले के साथ विदा हुए। जबकि पॉल करीब 15 वाहनों के काफिले के साथ सफेद गाड़ी में बैठकर राजभवन पहुंचे। डा. पॉल बृहस्पतिवार को राज्य के छठे राज्यपाल के तौर पर शपथ लेंगे।
राजभवन सचिवालय ने राज्यपाल अजीज कुरैशी की विदाई और नए राज्यपाल के प्रवेश पर मीडिया से दूरी बनाए रखी। अजीज कुरैशी की विदाई के समय सरकारी अमले के साथ उनके कुछ अजीज पहुंचे थे। जबकि परिवार के कुछ सदस्य पूर्व में भी दिल्ली और भोपाल रवाना हो गए थे।
डॉ. पॉल के राजभवन पहुंचने से पहले मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर उनकी आगवानी की। एयरपोर्ट पर उन्हें गार्ड ऑफ आनर दिया गया। राज्यपाल का काफिला सड़क मार्ग से राजभवन पहुंचा। जबकि मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से लौटकर राजभवन पहुंचे। उन्होंने पहले अजीज कुरैशी को विदाई दी फिर नए राज्यपाल का स्वागत किया। राज्यपाल के साथ परिवार के सदस्य भी आए हैं।
बोले कुरैशी, देवभूमि की यादें जेहन में रहेंगी
मिजोरम के मनोनीत राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी ने कहा कि देवभूमि की यादें हमेशा उनके जेहन में रहेंगी। कहा कि देवभूमि में विभिन्न वर्गों के लोगों बीच भाईचारे और सौहार्द की भावना मिसाल है।
प्रदेश के निवर्तमान राज्यपाल डॉ. कुरैशी बुधवार शाम पांच बजे शताब्दी एक्सप्रेस से दिल्ली रवाना हुए। इससे पहले रेलवे स्टेशन परिसर में पीएसी जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इस दौरान मीडिया से बातचीत में डॉ. कुरैशी ने कहा कि राज्यपाल रहते हुए उन्होंने प्रदेशवासियों के दुख दर्द को नजदीक से देखा है। यहां के लोग बहुत मेहनती और सहृदय हैं।
राज्यपाल डॉ. कुरैशी के विदाई मौके पर पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्घू, गढ़वाल आयुक्त एनएस नपलच्याल, अपर पुलिस महानिदेशक आरएस मीणा के अलावा राजभवन, सचिवालय, जिला प्रशासन, पुलिस और रेलवे के कई अधिकारी मौजूद रहे।
याद रहेगा वो वाकया
डॉ. कुरैशी ने कहा कि कुछ दिन पूर्व कुमाऊं से आते वक्त दुर्घटना में घायल युवक को सड़क पर पड़े देखा तो उन्होंने अपनी फ्लीट रोक दी थी। घायल युवक को अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बच गई। इस घटना को वह कभी नहीं भूल सकते।
जाते-जाते पेश की मिसाल
डॉ. कुरैशी जाते-जाते मिसाल पेश कर गए। वह चाहते तो राज्यपाल के प्रोटोकाल के अनुरूप कार से ही प्लेटफार्म के समीप तक जा सकते थे। अधिकतर पिछले राज्यपाल ऐसा ही करते रहे हैं। लेकिन डॉ. कुरैशी गार्ड आफ ऑनर लेने के बाद स्टेशन परिसर से पैदल ही प्लेटफार्म तक गए। प्लेटफार्म पर भी कुछ कदम पैदल चलने के बाद ही व्हील चेयर से कोच तक पहुंचे।
सरकार की पीठ भी थपथपा गए
राज्यपाल रहते हुए विकास के मुद्दे पर अक्सर राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा करने वाले डॉ. कुरैशी जाते वक्त सरकार की भी पीठ थपथपा गए। डॉ. कुरैशी ने कहा कि उत्तराखंड में विकास की कई संभावनाएं हैं। यहां बहुत काम करना बाकी है। कहा कि राज्य सरकार अच्छा काम कर रही है।