उत्तराखंड में शराबबंदी का आंदोलन पूरे उफान पर है। कई जगहों पर महिलाओं ने इसकी बागडोर अपने हाथ में ले ली है। इन स्थितियों के बीच, लंबे समय से शराबबंदी के लिए आंदोलित नशाबंदी परिषद ने पूर्ण बंदी की मांग उठाई है।
संगठन ने कहा है कि ये उपयुक्त समय है, जबकि बीजेपी सरकार ऐतिहासिक फैसला ले सकती है। इधर, सरकार ने कहा है कि शराब को लेकर अनर्गल आरोप लगाए जा रहे हैं। शराब की एक भी दुकान बढ़ाई नहीं जाएगी, बल्कि इसे धीरे-धीरे कम ही किया जाएगा।
आबकारी मंत्री प्रकाश पंत ने 64 स्टेट हाईवे को डिस्ट्रिक रोड में तब्दील करने के फैसले के पीछे शराब कारोबार की चिंता जैसी बातों को गलत बताया है। उन्होंने कहा है कि इस फैसले से नगर निकायों में विकास के नए रास्ते खुलेंगे।
शराब को लेकर त्रिवेंद्र सरकार इस वक्त बुरी तरह घिरी नजर आ रही है। सरकार के रणनीतिकारों के साथ ही बीजेपी संगठन के लोग भी इस चिंता में घुल रहे हैं कि समाधान कैसे निकले। शराब के ठेकों को आबादी क्षेत्र में खोलने का कई जगहों पर जबरदस्त विरोध हो रहा है। शराब के खिलाफ बने माहौल के बीच नशाबंदी परिषद ने सरकार से पूर्ण शराबबंदी लागू करने की मांग की है। परिषद के संयोजक जगमोहन भारद्वाज ने सीएम को पत्र भेजकर कहा है कि आखिर क्यों सरकार शराब से राजस्व कमाने का मोह छोड़ नहीं पा रही है, जबकि जनभावनाएं शराबबंदी के पक्ष में है।
इधर, आबकारी मंत्री प्रकाश पंत ने कहा है कि शराबबंदी की तरफ सरकार एक झटके से नहीं बढ़ सकती। यह काम धीरे-धीरे होगा। उन्होंने कहा कि 64 स्टेट हाईवे को डिस्ट्रिक रोड बनाने का फैसला निकायों में बेहतर स्थिति बनाने से जुड़ा है, न कि शराब की दुकानों को बचाने से। उन्होंने कहा कि इन 64 सड़कों को नगर निकायों को सौंपने के बाद इनके लिए अतिरिक्त बजट उपलब्ध कराया जाएगा।