‘सोचा नहीं था, ऐसे अचानक आएगा बेटा’
आरके वशिष्ठ ने बताया कि उनके बेटे को पहले फांसी की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई तो फांसी की सजा 45 दिन पहले उम्रकैद में बदल दी गई थी। अभी सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर अपील की गई थी। ऐसे में वह लोग सुप्रीम कोर्ट की प्रकिया पूरे होने का इंतजार कर रहे थे। यह उम्मीद थी कि सुप्रीम कोर्ट से कोई बड़ी राहत मिलेगी, लेकिन सौरभ अचानक भारत आ जाएगा। इसकी कोई पूर्व सूचना भी नहीं होगी, यह कभी नहीं सोचा था।
कतर के शेख का भी धन्यवाद दिया
कतर में ही रह रहीं सौरभ की पत्नी मानसा को भी इसका पता नहीं लग सका कि उनके पति सौरभ को रिहा कर दिल्ली भेज दिया गया है। पत्नी को यह सूचना मिली तो वह भी हैरत में रह गईं। सौरभ के परिवार ने पीएम मोदी के साथ ही कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी का भी धन्यवाद व्यक्त किया।
सीएम का जताएंगे आभार
पिता आरके वशिष्ठ बताते हैं कि उन्हें सीएम धामी से बेटे की रिहाई की मांग को लेकर मिलना था, लेकिन अब धन्यवाद देने के लिए जाएंगे। मंगलवार शाम को बेटा सौरभ आ जाएगा। इसके बाद बेटे के साथ सीएम का आभार व्यक्त करेंगे।
कतर से भेजा था प्रभु राम शोभायात्रा के लिए सहयोग
क्लेमेंटटाउन के समाजसेवी और सौरभ के परिवार के करीबी महेश पांडेय ने बताया कि सौरभ बेहद धार्मिक हैं। कतर से भी उन्होंने प्रभु राम की शोभायात्रा के लिए सहयोग भेजा था। सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में वह लगातार सहयोग करते रहते हैं।