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दोस्त से बोलकर गए थे शहीद मेजर विभूति, इस बार कई और आतंकियों को निपटा दूंगा

Tue, 19 Feb 2019 08:28 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal आफताब अजमत, अमर उजाला, देहरादून
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शहीद मेजर विभूति
मेरी हर गोली पर एक आतंकी का नाम लिखा है, मेजर विभूति जब भी दोस्तों के बीच होते, यह जरूर कहते थे। उनके करीबी दोस्त बताते हैं कि आतंकियों की हरकतों से मेजर विभूति का खून खौल जाता था, आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिलने पर वे अपनी टीम में सबसे आगे आकर मुकाबला करते थे।
 
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अपनी पत्नी की साथ शहीद मेजर - फोटो : फाइल फोटो
मेजर विभूति के दोस्त अचानक उनकी शहादत की खबर सुनकर सदमे में हैं। पड़ोस में रहने वाले बचपन के दोस्त मयंक खंडूरी ने बताया कि वर्ष 2012 में ओटीए चेन्नई से पासआउट होकर मेजर विभूति 55 राष्ट्रीय राइफल्स में भर्ती हुए थे। कश्मीर में तैनाती के बाद से हमेशा विभूति जोश से लबरेज रहते थे। बीते वर्ष दिसंबर में घर आए तो मेरे पास भी आए। हमनेे काफी देर गपशप की।
 
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martyr major vibhuti dhaundiyal
मैंने कश्मीर और वहां आतंकियों की हरकतों को लेकर सवाल किया तो विभूति का खून खौल गया। मयंक ने बताया कि जब भी आतंकियों के बारे में बात करते थे, तो उनका चेहरा गुस्से से भभक उठता था। विभूति ने मुझे बताया कि शादी से पहले कई आतंकियों को आमने-सामने की मुठभेड़ में मौत के घाट उतारा। अब नए टारगेट हैं, इन्हें भी बख्शूंगा नहीं।

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pulwama martyr - फोटो : पीटीआई
मयंक बताते हैं कि जब जनवरी में मेजर विभूति छुट्टी से वापस जा रहे थे, तोे बोलकर गए थे कि मेरी हर गोली पर एक आतंकी की मौत लिखी है। हर पल कुछ कर गुजरने की चाह रखने के इस जोशीले स्वभाव के चलते मेजर विभूति ढौंडियाल को 55 राष्ट्रीय राइफल में अलग पहचान मिली हुई थी।
 
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बेटा जोश में होश मत खोना
मेजर विभूति की मां सरोज ढौंडियाल जब बेटे की बहादुरी के किस्से सुनती थीं तो मां होने के नाते चिंतित भी होती थीं। उन्हें हमेशा बेटे के जोश की चिंता रहती थी। फोन पर बात होने पर वे हर बार विभूति को समझाती थीं कि बेटा जोश तो ठीक है, मगर कभी भी जोश में होश मत खोना। तुम्हारे सिवा इस दुनिया में हमारा अब है ही कौन?
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