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चुनावी मैदान में इस 'कसम' के बाद उतरें उत्तराखंड के नेता

Tue, 11 Mar 2014 10:20 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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2014 लोक सभा चुनाव के लिए टिकट के झगड़े में उलझी पार्टियों के सामने अब जन अपेक्षाओं पर खरा उतरने की पहाड़ जैसी चुनौती भी है। विभिन्न स्वयं सेवी संगठनों ने संयुक्त रूप से जन घोषणापत्र जारी किया है।
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जन घोषणापत्र में इन मुद्दों को जगह
इन संस्थाओं का साफ कहना है कि राज्य गठन के 13 साल बाद भी लोगों से जुड़े मुद्दे राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र में जगह नहीं पाते। जन घोषणापत्र में इन मुद्दों को जगह दी गई है और अगले पांच साल तक लगातार यह देखा जाता रहेगा कि इन मुद्दों पर कौन क्या कर रहा है।

इन परियोजनाओं पर तुरंत रोक लगाई जाए

माउंटेन कलेक्टिव एंव नदी बचाओ अभियान की ओर से जारी इस घोषणा पत्र में साफ कहा गया है कि प्रदेश में सुरंग आधारित जल विद्युत परियोजनाओं पर तुरंत रोक लगाई जाए। सांसद और विधायक निधि को करने की मांग भी जनघोषणा पत्र में की गई है।

घोषणा पत्र में जलनीति को प्रमुखता दी गई है। जल पर पंचायतों के अधिकार की बात की गई है। मौसम बदलाव और तेजी से बढ़ रही आपदा को देखते हुए गांव के स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन की बात की गई है।

घोषणापत्र में पहाड़ में यात्रियों की संख्या को नियंत्रित करने और निर्माण कार्य पहाड़ की प्रकृति को देखते हुए बनाए जाने की मांग भी की गई है। यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि प्रदेश में साहसिक और धार्मिक पर्यटन को मुख्य आधार बनाया जाए। ग्रीन बोनस का उपयोग प्रदेश की हरीतिमा को बढ़ाने के लिए किया जाए।
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जन-घोषणा पत्र - 2014 के मुख्य बिंदु

बीपीएल सर्वे- बीपीएल सर्वे के लिए पर्वतीय क्षेत्रों के अनुकूल मानक तय हों।

जलनीति- प्रत्येक ग्रामीण को स्वच्छ पानी निशुल्क मिले। जल पर स्थानीय लोगों का स्वामित्व। किसी गांव अथवा नगर के पास पानी का उपयोग बाहरी क्षेत्रों के लिए करने से पहले संबंधित पंचायतों/निकायों की स्वीकृति अनिवार्य हो। स्थानीय जल संस्कृति और ज्ञान के आधार पर चाल-खाल, मेड़बंदी, टेंच निर्माण, वर्षा जल संग्रहण, चौड़ी पत्ती के वृक्षों का रोपण हो। जलस्रोतों का संरक्षण हो।

वन नीति- हर गांव में पंचायती वनों का गठन किया जायेगा। वन पंचायतें पूर्ण रूप से स्वायत्त इकाइयां होंगी जिनमें वन विभाग की भूमिका मात्र तकनीकी सलाहकार की होगी। प्रत्येक गांव का अपना वन होगा। आरक्षित एवं संरक्षित क्षेत्रों में जनता के परंपरागत अधिकारों की बहाली की जायेगी तथा नये संरक्षित क्षेत्रों का गठन केवल मानव हस्तक्षेप विहीन क्षेत्रों में ही किया जायेगा। जंगलों में लघु वन उपज को निकालने एवं विपणन का अधिकार ग्राम सभाओं के पास होगा।

ग्रीन बोनस- ग्रीन बोनस का इस्तेमाल करने के लिये राज्य स्तर पर एक रोड मैप तैयार किया जाए।

कृषि एवं भूनीति-समान भू-नीति लागू की जायेगी। बेनाप भूमि को वन भूमि के दायरे से बाहर कर उसे ग्राम पंचायत को सौंपा जाय। उत्तराखंड में पैमाइश करवायी जाये। महिलाओं को किसान का दर्जा दिया जायेगा। जमींदारी उन्मूलन कानून में संशोधन किया जाये। कृषि भूमि के गैर कृषि उपयोग पर प्रतिबंध लगे। भूमि बंदोबस्त और चकबंदी का कार्य तुरंत शुरू किया जाये।

पंचायत- नया पंचायती राज एक्ट बनाया जाये।

शिक्षा एवं स्वास्थ्य -शिक्षा एवं स्वास्थ्य निजी हाथों में नहीं सौंपा जायेगा। कुल बजट का कम से कम 30 प्रतिशत अनिवार्य रूप से शिक्षा पर खर्च किया जायेगा। दोहरी शिक्षा प्रणाली बंद हो।     

बाल अधिकार / बाल संरक्षण-बाल आयोग, बाल नीति का प्रावधान किया जायेगा।

महिला नीति- महिलाओं के हितों केसंरक्षण केलिए ठोस नीति बनाई जाए

विधायक/सांसद निधि- लालबत्तियों के वितरण पर अंकुश लगाया जायेगा। सांसद निधि व विधायक निधि को समाप्त किया जायेगा।

रोजगार -रोजगार नीति का आधार परिवार केंद्रित योजना होगी। मनरेगा में 200 कार्यदिवस व 250 रूपये मजदूरी की गारंटी सुनिश्चित की जायेगी। युवा नीति बनायी जायेगी।

नागरिकता के अधिकार-ऐसा कानून हो कि लोगों द्वारा कही जाने वाली बातों को सरकार गंभीरता से सुने तथा उस पर अमल करे।

जल विद्युत परियोजनाएं-सुरंग आधारित जलविद्युत परियोजनाओं पर प्रतिबंध । माइक्रो प्रोजेक्टस को बढ़ावा

निर्माण कार्य- साहसिक पर्यटन एवं धार्मिक पर्यटन पेर फोकस।

पर्यटन -गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ तथा इसके दूसरे पर्यटक स्थलों के लिए वर्ष भर में पर्यटकों की संख्या सीमित की जाए

शिक्षा- शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाय।

स्वास्थ्य- स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत किया जाय।

आपदा प्रबंधन- संभावित आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पहले से ही राशन, मिट्टी का तेल तथा वैकल्पिक ऊर्जा के साधनों का भंडारण। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पुर्ननिर्माण के लिये प्रभावितों के साथ एक रोड मैप तैयार किया जाये।

हिमालय नीति- लोकनीति के अनुसार हिमालय नीति बनाने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव डाला जाएगा।
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