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महिला-पुरुषों ने साथ बढ़ाया हाथ तो बुझी गांव की प्यास

Tue, 29 Sep 2015 09:41 AM IST
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून
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देहरादून जिले के कालसी में महिला पुरुषों ने मिलकर काम किया तो पूरे गांव की प्यास बुझ गई। सोलर ड्यूल हैंडपंपों ने देहरादून कालसी के पास स्थित डुमेट और बाड़वाला गांव के लोगों की जिंदगी बदल दी।
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कई किमी दूर नदियों से पानी भरकर लाने वाले लोगों ने नहीं सोचा था कि पानी चलकर उनके घर के पास तक आ जाएगा। दिनभर पानी ढोने वाली महिलाओं का समय बचा तो उन्होंने भी पति का हाथ बंटाना शुरू कर दिया।

अब ना ही तो इन्हें पानी के लिए अधिक चलना पड़ता है और ना ही घंटों लाइनों में लगना पड़ता है। घर के समीप के स्टैंड पोस्ट से रात-दिन मिलने वाले पानी से इनकी दिनचर्या ही बदल गई।
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पेयजल निगम की ओर से दून जिले में 66 सोलर ड्यूल हैंडपंप लगाए जा रहे हैं, जो कि सहसपुर, विकासनगर, डोईवाला, रायपुर आदि ग्रामीण क्षेत्रों में लगेंगे। इनमें से तीस सोलर ड्यूल हैंडपंप लग चुके हैं। विकासनगर के डूमेट और बाड़वाला आठ नंबर बस्ती में दो महीने पहले ही यह लगाए गए हैं।

इन गांवों में तीस सालों से रह रहे लोगों ने कभी नहीं सोचा था कि बिना भागदौड़ किए उन्हें पानी मिल सकता है। अधिकतर लोग नदी तक जाकर ही पीने का पानी लाते थे, कपड़े धोते थे, वहीं बच्चों को नहलाते थे। एक साल पहले इनके क्षेत्रों में हैंडपंप तो लगा तो दूर-दराज के गांव के लोग भी पानी भरने यही आने लगे।

स्थिति यहां तक हो गई कि पानी के लिए लंबी लाइन के चलते झगड़े तक होने लगे। नदियों का पानी पीने से अक्सर गांवों में कोई ना कोई बीमार रहता। लेकिन अब सभी समस्याओं से गांव के लोगों को छुटकारा मिल चुका है। स्थिति यह है कि पहले तक सुबह से शाम तक जो महिलाएं सिर्फ पानी ढोती थी अब आधे घंटे में अपना काम निपटा कर ध्याणी पर निकल जाती हैं।
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इन लोगों ने मिलकर किया ये बदलाव्र

गांवों में एक साल पहले हैंडपंप लगाए गए, लेकिन दिक्कत यह थी हैंडपंप एक और पानी भरने वाले एक गांव में तीन सौ। यानी दो हैंडपंपों पर 600 लोग निर्भर थे। हैंडपंप पर लगने वाली भीड़ से बचने के लिए लोग नदियों का ही रास्ता तय करते थे। दो महीने पहले पेयजल निगम की ओर से हैंडपंपों को सोलर चालितए किया गया।

इसके लिए हैंडपंप के पास पांच-पांच हजार लीटर के पीबीसी टैंक लगाए गए। पीबीसी टैंक को प्री-फैब्रिकेटेड स्टील स्ट्रक्चर के ऊपर रखा गया। प्री-फेब्रिकेटेड स्ट्रक्चर जहां जल्द खड़ा हो जाता है, वहीं बेहद सस्ता भी पड़ता है। हैंडपंप में सौर ऊर्जा चालित डीसी (डाइरेक्ट करंट) पंप डाला गया। पंप से निकलने वाले पानी को एक लाइन से टैंक में स्टोर किया जाता है।

दूसरी लाइन से स्टैंड पोस्ट जोड़े गए हैं। स्टैंड पोस्ट होने से एक ओर जहां जल्दी पानी भर जाता है वहीं स्टैंड पोस्ट की लाइन को खींचकर घरों के पास तक भी ले जाया जा सकता है। इन नलों से अब छोटे बच्चे भी पानी भर लिया करते हैं। हैंडपंप और स्टैंड पोस्ट वाले डबल सिस्टम के कारण ही इस योजना का नाम सोलर ड्यूल हैंडपंप रखा गया है।

इस तकनीक में बिजली का बिल्कुल भी खर्च नहीं है। वहीं नदियों से पंपिंग योजना कर गांव तक पानी लाने में जहां दस से पंद्रह लाख तक का खर्च आता है और वो भी बरसात में बह जाने का खतरा रहता है। वहीं इस योजना में मात्र चार से पांच लाख रुपए तक खर्च आता है। नदियों के गंदे पानी की जगह अब हर कोई आसानी से स्टैंड पोस्ट से पानी भर सकता है। फिल्हाल गांवों में दो से चार तक हैंडपंप लगाए गए हैं, हालांकि लोग इनकी संख्या और भी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, जिसके लिए प्रपोजल तैयार कर लिया गया है।
- जीतेंद्र देव, अधिशासी अभियंता, पेयजल निगम, यांत्रिक शाखा

पहले तक नदी में पानी लेने के लिए जाना पड़ता था। नदी का पानी ही छानकर पीते थे। हैंडपंप पर इतनी भीड़ होती थी कि पीने तक का पानी नहीं मिल पाता था लेकिन अब तो क्षेत्र में पानी ही पानी है।
- भोपाल सिंह, क्षेत्रवासी डुमेट, नया बस्ती
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