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‘मुख्यमंत्री बात करें तो निकल आएगा रास्ता’ आंदोलित संयुक्त मोर्चा की सरकार से पेशकश

Sun, 20 May 2018 10:37 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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trivendra singh rawat
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‘मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत यदि बात करेंगे तो बीच का रास्ता निकल आएगा। जिस तरह से उन्होंने सफाई कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त कराई, उसी तरह वह संयुक्त मोर्चा और सरकार के बीच के गतिरोध को खत्म कर सकते हैं।’ यह कहना है उत्तराखंड कार्मिक, शिक्षक, आउटसोर्स संयुक्त मोर्चा का। मोर्चा के मुख्य संयोजक प्रहलाद सिंह का कहना है, ‘कर्मचारी कोई टकराव नहीं चाहते। उनकी नाराजगी उन्हें पहले से दिए जा रहे लाभों को छीन लिए जाने से हैं।’ प्रदेशव्यापी धरना कार्यक्रम में कर्मचारियों के मिले समर्थन से मोर्चा उत्साहित है और अब एक लाख कर्मचारियों की रैली करने की तैयारी में जुट गया है। रविवार को मोर्चा की एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है, जिसमें भावी रणनीति पर मंथन होगा।

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टकराव चाहते हैं न हड़ताल 
उत्तराखंड कार्मिक, शिक्षक, आउटसोर्स संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों का कहना है कि लंबित मांगों को लेकर न तो वह सरकार से कोई टकराव चाहते हैं और नहीं प्रदेश को हड़ताल में झोंकना चाहते हैं। लेकिन सरकार को उदारता दिखानी होगी। मोर्चा की मानें तो उन्हें मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से कोई शिकायत नहीं हैं। लेकिन वह नौकरशाही के रवैये से क्षुब्ध है। मोर्चा का आरोप है कि प्रदेश की नौकरशाही मुख्यमंत्री को तथ्यों की सही जानकारी नहीं दे रही है, जिससे गतिरोध की स्थिति पैदा हो रही है।

मुख्यमंत्री से ही बनेगी बात
मुख्यमंत्री के निर्देश पर ही मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने संयुक्त मोर्चा के मांग पत्र बिंदुवार चर्चा की थी और कुछ मांगों के समाधान का आश्वासन दिया था। लेकिन संयुक्त मोर्चा की शिकायत है कि बैठक में मांगों के ठोस समाधान नहीं निकले। वे मांगों के समाधान के शासनादेश चाहते हैं। लेकिन उनके हिस्से सिर्फ आश्वासन आएं हैं। इसलिए मोर्चा चाहता है कि मुख्यमंत्री पहल करें, कोई न कोई रास्ता निकल जाएगा।
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ये मांगें मान लें तो निकल जाएगा रास्ता
-उपनल कर्मचारियों को रोस्टर पर रखे जाने के आदेश को निरस्त कर दिया जाए।
-एसीपी की पुरानी व्यवस्था 10, 16, 26 को लागू किया जाए। नई व्यवस्था निरस्त हो।
-बिजली कर्मचारियों की एसीपी को लागू करें।
-सातवें वेतनमान के भत्तों का शासनादेश तत्काल जारी हो।
-कर्मचारियों का वाहन भत्ते पर लगी अघोषित रोक को हटाया जाए।
-कर्मचारियों को पदोन्नति में शिथिलीकरण का लाभ दिया जाए।
-सभी कर्मचारियों को उनके पूरे सेवाकाल में तीन पदोन्नति या एसीपी का लाभ दिया जाए।

इन सवालों का जवाब चाहता है मोर्चा 
संयुक्त मोर्चा सरकार से कुछ सवालों के जवाब चाहता है। इन सवालों के जरिये वह सरकारी कर्मचारियों के पदोन्नति, वेतन एवं भत्तों में व्याप्त विसंगति के मसले उठा रहा है।

शिथिलीकरण में पक्षपात क्यों?
मोर्चा का सवाल पदोन्नति में शिथिलीकरण को लेकर है। उसका आरोप है कि अधिकारियों को यह लाभ दिया गया, लेकिन जब कर्मचारियों की बारी आई तो सरकार ने हाथ खड़े कर दिए। जबकि उच्च न्यायालय ने शिथिलीकरण देने के आदेश किए हैं। लेकिन इस आदेश को दबा दिया है।

उपनलकर्मियों से भेदभाव क्यों?
संयुक्त मोर्चा का यह सवाल उपनलकर्मियों को लेकर जारी शासनदेश से जुड़ा है। गत 27 अप्रैल  को कार्मिक विभाग ने एक शासनादेश किया, जिसमें उपनल कर्मियों की नियुक्ति में रोस्टर प्रणाली को लागू किया गया है। उपनलकर्मियों को इस पर कड़ा एतराज है। वे आशंकित हैं कि रोस्टर प्रणाली लागू होने से उन्हें एक-एक करके हटा दिया जाएगा और उनकी सेवाएं कभी नियमित होने लायक नहीं हो पाएंगी।

वाहन भत्ता क्यों काटा?
संयुक्त मोर्चा विभिन्न विभागों में कर्मचारियों के वाहन भत्ते में कटौती के फैसले से नाराज है। वित्त विभाग ने वाहन भत्ते में कटौती का कोई आदेश जारी नहीं किया है। मोर्चा की शिकायत है कि जब शासन ने कोई आदेश नहीं किया है, तो उनका वाहन भत्ता क्यों काटा जा रहा है?

वेतन से रिकवरी क्यों ?
मोर्चा को वित्त विभाग के उस फरमान पर कड़ी आपत्ति है, जिसमें कतिपय कार्मिकों कथिततौर पर गलत वेतन निर्धारण से बढ़े वेतन की रिकवरी होनी है। मोर्चा इसे कर्मचारियों का उत्पीड़न करार दे रहा है। 
 
एसीपी का लाभ क्यों छीना?
कार्मिकों के संयुक्त मोर्चा का कहना है कि प्रदेश के कार्मिकों को 10, 16 और 26 वर्ष में तथा बिजली कर्मचारियों को नौ, 14 व 19 वर्ष मेें तीन एश्योर्ड कैरियर प्रमोशन (एसीपी) की सुविधा प्राप्त थी। लेकिन यूपी की देखादेखी में पिछली सरकार में इसे बदलकर 10, 20, 30 वर्ष कर दिया। मोर्चा का कहना है कि जो लाभ उन्हें पूर्व में मिल रहा था, उसे क्यों छीना गया? 

कुछ संवर्गों को छह-छह प्रमोशन क्यों?
संयुक्त मोर्चा का कहना है कि शिक्षा समेत कई अन्य विभागीय संवर्गों में कार्मिकों को पदोन्नति की सुविधा नहीं है। न ही उन्हें एसीपी का लाभ मिल रहा है। इसके विपरीत कतिपय संवर्ग ऐसे भी हैं, जिन्हें पूरे सेवाकाल में छह-छह पदोन्नतियों का लाभ मिल रहा है। मोर्चा का सवाल है कि आखिर प्रमोशन में यह विसंगति क्यों हैं? 

वित्तीय भार नहीं पड़ेगा
प्रदेश सरकार के अफसरों का भ्रम है कि कर्मचारियों की मांगों से राजकोष पर भारी भरकम वित्तीय भार पड़ेगा। यह बात बिल्कुल गलत है। कई ऐसी मांगें हैं, जिनमें कर्मचारियों को पहले से मिल रही सुविधाओं में कटौती की गई हैं। उनमें वित्तीय भार बढ़ने का सवाल कहां पैदा हो रहा है। सरकार की वित्तीय स्थिति को लेकर कर्मचारी वर्ग भी पूरी तरह से गंभीर है और सोच विचार कर ही अपनी मांगें रख रहा है। लेकिन वित्त विभाग के अफसरों का मानना है कि संयुक्त मोर्चा की सभी मांगे पूरी करने पर सरकार दो से ढाई हजार करोड़ रुपये के आर्थिक बोझ के नीचे आ जाएगी। पुरानी पेंशन लागू करने, एसीपी का लाभ देने, प्रमोशन में शिथिलीकरण देने समेत अन्य मांगों को पूरा करने पर सरकार को अतिरिक्त धनराशि व्यय करनी पड़ेगी। सातवें वेतनमान के भत्तों के लिए ही सरकार को 450 करोड़ रुपये की भारी भरकम राशि जुटानी होगी। 

मैं बातचीत के लिए तैयार, मगर दबाव में नहीं: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत यदि बात करेंगे तो बीच का रास्ता निकल आएगा। आंदोलित कर्मचारियों का ऐसा मानना है, फिर बातचीत में कहां गतिरोध है ? अमर उजाला के इस सवाल पर सीएम रावत ने कहा कि मैं अपने कर्मचारियों से क्यों नहीं बात करना चाहूंगा, मगर मैं दबाव में कोई बातचीत नहीं कर सकता। कर्मचारी अपनी जायज मांगों को लेकर सही तरीकों से आएं, हम सब कुछ सुनने को तैयार हैं। लेकिन कर्मचारियों को अपने साथ राज्यहित भी ध्यान में रखना होगा। सफाई कर्मचारियों की जो भी मांगें जायज थीं, हमने मान लीं। हम कर्मचारियों की मांगों का अध्ययन करवा रहे हैं, मुख्य सचिव इस पर काम भी कर रहे हैं। चारधाम यात्रा सीजन के मद्देनजर कर्मचारियों को भी धरना-प्रदर्शन से हटकर अपने काम में लगना चाहिए, ताकि पर्यटन को लेकर बेहतर माहौल बने। पैसा आएगा, तभी हम कर्मचारियों की बेहतरी को लेकर सोच सकेंगे।

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