नगर पालिका विस्तार के विरुद्ध चल रहे 16 ग्राम पंचायतों के आंदोलन ने उग्र स्वरूप लेना शुरु कर दिया है। इसके तहत मंगलवार को सैकड़ों ग्रामीणों ने मानव श्रंखला बनाकर आधे घंटे तक कलक्ट्रेट परिसर का घेराव किया।
इस दौरान ग्रामीणों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए, नेताओं व अधिकारियों को निकट भविष्य में होने वाले उग्र आंदोलन के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी। ग्रामीणों ने कहा कि अगर विधान मंडल की बैठक में कोई सकारात्मक निर्णय नहीं निकला तो, सरकार को ग्रामीणों के रौद्र रूप का सामना करना पड़ेगा।
इससे पूर्व सत्याग्रह के 16वें दिन प्रभावित ग्राम पंचायतों सहित अन्य गांवों के प्रतिनिधियों ने भी धरना स्थल पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया। साड़ा, कुरोली, थलन, साल्ड, बोंगाड़ी आदि गांवों से आए विजेंद्र गुसांई, अमर सिंह, द्वारिका प्रसाद, गजेंद्री देवी, संतोषी देवी आदि ग्रामीणों ने कहा कि जनपद के सभी गांव जन विरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर लड़ेंगे। सरकार की मंशा 16 ग्राम पंचायतों का शहरीकरण करने के बाद अन्य गांवों को भी समाप्त करने की है, जिसे सफल नहीं होने दिया जाएगा।
वहीं, नागेंद्र जगूड़ी ने कहा कि संविधान ने पंचायतों को स्वशासन का अधिकार दिया है। लेकिन सरकार लोकतंत्र की हत्या कर इस अधिकार को हड़पना चाहती है। जिसके विरोध में बुधवार को काली पट्टी बांधकर मौन प्रदर्शन किया जाएगा। जबकि, 29 तारीख को शहरी विकास मंत्री के जनपद दौरे के दौरान उन्हें काले झंडे दिखाकर जेल भरो आंदोलन शुरु किया जाएगा। इस मौके पर सुनील कुमार, तनुज गुसांई, विजेंद्र नौटियाल, सरिता जोशी, पुलम लाल, उर्मिला देवी, प्रेमवंती देवी, जगबीर चौहान, दिनेश उनियाल, योगेंद्र सिंह, रामगोपाल नौटियाल आदि मौजूद थे।