देहरादून के चाय बागानों को अधिग्रहीत कर वहां पर स्मार्ट सिटी बनाने के खिलाफ अभियान तेज हो गया है।
मंगलवार को चाय बागानों को बचाने के लिए जनसंपर्क अभियान चलाया गया। बुधवार को गांधी पार्क में खुली वृहद बैठक प्रस्तावित है। अभियान के समर्थन में सीपीआई के वरिष्ठ नेता व केरल के पूर्व वन मंत्री विनय विश्यम यहां बतौर मुख्य वक्ता पहुंचेंगे। इसके बाद शाम को कैंडल मार्च निकाला जाएगा।
मंगलवार को चाय बागान मजदूर सभा समेत विभिन्न जनसंगठनों ने बुधवार को गांधी पार्क में होने वाली वृहद बैठक, कैंडल मार्च के लिए जनसंपर्क अभियान चलाया। चाय बागान बचाओ अभियान में रिटायर्ड आईएएस सुरेंद्र सिंह पांगती, पीसी थपलियाल, समर भंडारी, चित्रा गुप्ता, जगमोहन मेंदीरत्ता, जीत सिंह, रविंद्र जुगरान, डॉ. हिमांशु शेखर, आरके धुंता, अशोक शर्मा आदि ने बड़ी संख्या में लोगों से मुलाकात कर चाय बागानों को बचाने का आह्वान किया।
ये लोग विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, सामुदायिक समूहों से मिले। बुधवार के कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए इन्होंने ताकत झोंक दी है।
दूसरी तरफ, चाय बागानों के आसपास के गांवों के जनप्रतिनिधियों व निवासियों की बैठक में हर हाल में चाय बागानों को बचाने का निर्णय लिया गया। इसमें आरकेडिया, हरबंसवाला, अंबीवाला, उम्मेदपुर, सेंवला, बनियावाला के ग्रामीण शामिल रहे।
200 एकड़ में बन सकती है स्मार्ट सिटी : नौटियाल
म आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता अनूप नौटियाल का कहना है कि चाय बागानों में स्मार्ट सिटी नहीं बननी चाहिए। चाय बागान में स्मार्ट सिटी बनी तो इसके भयानक दुष्परिणाम सामने आएंगे।
उन्होंने कहा कि केंद्र की जो नीति है उसके अनुसार बमुश्किल 200 एकड़ में स्मार्ट सिटी बन सकती है। ऐसे में दो हजार एकड़ जमीन अधिग्रहीत करने की हठधर्मिता समझ से परे है। नौटियाल ने कहा कि चाय बागानों को अधिग्रहीत करने के विरोध में वे सबके साथ मिलकर संयुक्त लड़ाई छेड़ेंगे।
टी गार्डन में पैमाइश और सर्वेक्षण
मंगलवार को राजस्व विभाग व मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की टीमें अलग-अलग चाय बागान पहुंचीं। इन दोनों विभागों ने पैमाइश व सर्वेक्षण का काम किया। रिकॉडर्स की भी जांच की गई। इसके साथ ही राजस्व विभाग गहन जांच व कागजों को परखने में जुट गया है।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि उच्चाधिकारियों के कड़े निर्देश के कारण अधिकारी युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं। सुबह से लेकर देर शाम तक राजस्व व एमडीडीए के दल चाय बागानों व आसपास के ग्रामों में डेरा जमाए रहते हैं।
चाय बागान बचाने को समर में कूदेंगे सतपाल महाराज
पूर्व सांसद और भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य सतपाल महाराज भी अब चाय बागानों को बचाने के लिए आगे आ गए हैं। एक बयान में उन्होंने कहा है कि स्मार्ट सिटी के नाम पर चाय बागान नष्ट नहीं किए जाने चाहिए।
चाय बागानों में काम करने वाले श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा। दून का पर्यावरण खतरे में पड़ेगा। यहां निवास करने वाले जीव-जंतुओं का जीवन समाप्त हो जाएगा। जैव विविधता का नाश कतई नहीं होने दिया जाएगा। सतपाल महाराज ने कहा कि चाय बागानों को बचाना और प्रोत्साहित करना वक्त की मांग है।
इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। इसके साथ ही पर्यावरण सम्मत विकास होगा व रोजगार के मौके बढ़ेंगे। प्रदेश सरकार ऐसा न कर पर्यावरण, जैवविविधता व श्रमिक विरोधी नीति पर चल रही है। चाय सेक्टर को तबाह किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि चाय बागानों का स्वरूप बदलने से उत्तराखंड की आर्थिकी पर विपरीत असर पड़ेगा। सतपाल महाराज ने कहा कि हमें यह भी समझना होगा कि चाय बागान हेरिटेज श्रेणी में आते हैं।
इससे ऐतिहासिक व चाय पर्यटन के तौर पर भी विकसित किया जा सकता है। जो लोग चाय बागानों को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं वे उनके पक्ष में खुलकर आगे आएंगे। प्रदेश सरकार की इस नीति के खिलाफ बड़ा संघर्ष किया जाएगा।