उसपर थाना मुजफ्फरनगर में वर्ष 2018 में शस्त्र अधिनियम में मुकदमा पंजीकृत है। पुलिस अन्य आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड खंगाल रही है। पुलिस ने जिन लोगों को गिरफ्तार किया है उनमें ज्यादातर पश्चिमी उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं। कुछ लोग पश्चिम बंगाल से भी जुड़े हैं।
कारोबार संचालित करने के लिए चार माह पूर्व किराए पर लिया कमरा
पुलिस क्षेत्राधिकारी उत्तम सिंह जिमिवाल ने बताया कि गैंग की मुखिया एक महिला है। उसके पति की मौत के बाद उसने एक मुस्लिम युवक से शादी कर ली। दोनों मुजफ्फरनगर में वर्ष 2008 से देह व्यापार में संलिप्त थे। दोनों ने चार माह पूर्व ही ऋषिकेश में एक फ्लैट किराए पर लिया था। सेक्स रैकेट की संचालिका से होटल के संचालक की मुलाकात मुजफ्फरनगर में हुई थी। इसी के बाद तीर्थनगरी में कालाकारोबार संचालित करने की योजना बनी।
जस्ट डायल से करते थे ग्राहकों की तलाश
सीओ उत्तम सिंह ने बताया कि पूछताछ के दौरान सरगना और उसके पति ने बताया कि जस्ट डायल ऐप के जरिए वे ग्राहकों की तलाश किया करते थे। गैंग मुखिया ग्राहकों को संपर्क में आने के बाद तवोपन क्षेत्र के होटलों में कमरा किराए पर लेने को कहती थी। इसके बाद पति ग्राहकों से रकम वसूल कर होटल में ग्राहकों की पसंद के मुताबिक महिलाओं को भेजता था। मोबाइल फोन पर लड़कियों के फोटो भेजकर पसंद छांटी जाती थी।
सात हजार रुपए था चार्ज
थानाध्यक्ष आरके सकलानी ने बताया कि जिस्मफरोशी में संलिप्त महिलाएं पूरी रात होटल में बिताने के पांच से सात हजार रुपए वूसल करती थीं। गैंग की सरगना ग्राहकों से दोगुनी कीमत वसूल करते थे। उसमें से तय कीमत के मुताबिक महिलाओं को उनका हिस्सा दे दिया जाता था। महिलाएं एक घंटे के लिए एक हजार रुपए वसूलती थीं।
फर्जी पहचान पत्र से लेते थे होटल में कमरा
पुलिस के अनुसार पकड़े गए लोगों में दो दंपत्ति ऐसे भी हैं जो आपसी सहमति से जिस्मफरोशी के धंधे में लिप्त थे। गैंग की मुखिया ने सभी महिलाओं की पहचान छुपाने के लिए फर्जी पहचान पत्र उपलब्ध कराया था। इन फर्जी पहचान पत्रों के आधार पर यह महिलाएं होटल में कमरा किराए पर लेती थीं।