घटना की रात दोनों नगर निगम के पिछले दरवाजे से दाखिल हुए
रविंद्र को राजकिशोर ने कहा कि वह दाखिल खारिज कराने पर उसे दो प्रतिशत का कमीशन देगा। इसके अलावा कुल जमीन में पांच हजार रुपये प्रति गज के हिसाब से भुगतान भी करेगा। इसके बाद रविंद्र रावत ने प्रयास शुरू कर दिए। कई बार चक्कर काटे मगर कामयाब नहीं हो पाया। इसके बाद उसने मन बना लिया कि वह खुद ही रजिस्टर चोरी कर दाखिल खारिज कर लेगा। इसके लिए वह नगर निगम के स्टोर रूम में 27 बटे 27 रजिस्टर चोरी करने की योजना बनाने लगा।
इसके लिए उसने अपने भाई योगेश को साथ लिया। साथ ही अपने एक रिश्तेदार कुलदीप को भी योजना में शामिल किया। एसएसपी ने बताया कि कुलदीप एक कंपनी में काम करता है। उसे इन्होंने चार मई की रात में नगर निगम के बाहर खड़ा किया था। ताकि अगर कोई गतिविधि हो तो वह सूचना दे दे। घटना की रात ये दोनों नगर निगम के पिछले दरवाजे से दाखिल हुए। इसके बाद वहां रखी सीढ़ी से स्टोर रूम तक पहुंचे और बड़े पेचकस से ताला तोड़कर स्टोर रूम में दाखिल हो गए।
वहां बहुत ढूंढने पर भी रजिस्टर नहीं मिला। इसके बाद उसका भाई योगेश रजिस्टर ढूंढने लगा। योगेश को एक रजिस्टर मिला लेकिन यह बकराल वाला का लेखा जोखा रजिस्टर था। ऐसे में वह इस रजिस्टर को वापस रखने लगा लेकिन वहां एक महिला आ गई।
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इस पर दोनों भाई इस रजिस्टर को लेकर आ गए। रजिस्टर को उन्होंने एक पन्नी में रखा और आशारोड़ी जंगलों में फेंक दिया। एसएसपी ने बताया कि रजिस्टर को बरामद कर लिया गया है। योगेश और कुलदीप की तलाश की जा रही है। इसके अलावा प्रवीण रावत और राजकिशोर की इसमें क्या भूमिका है। इसकी भी जांच की जा रही है।