अगर पुलिस को मिल जाता तो बच जाती जान
एसपी सिटी अमित श्रीवास्तव सोमवार की देर रात कठघरिया में गश्त पर थे। उन्होंने रात को करीब 12-12.30 बजे बाबा हैड़ाखान आश्रम के सामने एक बाइक खड़ी देखी। बाइक दिखने पर पुलिस कर्मियों ने टार्च जलाकर आश्रम के अंदर झांका, लेकिन कोई नहीं दिखा। इस पर पुलिस बाइक थाने ले गई। बाद में पता चला कि बाइक कैलाश पांडेय की ही थी। अगर उस वक्त वह पुलिस को मिल जाता तो शायद जान बच सकती थी।
हनुमान जी का भक्त था, उन्हीं के दर पर तोड़ा दम
कैलाश के दोस्त गिरीश ने बताया कि वह बेहद मिलनसार, मददगार और हंसमुख था। बिठौरिया से पनियाली, कठघरिया तक सबकी मदद करता था। वह अक्सर आश्रम में भी भजन मंडली में भजन गाया करता था। कैलाश हनुमान जी का भक्त था। शायद यही वजह रही होगी कि अंतिम समय में भी उसने हनुमान जी की मूर्ति के सामने ही दम तोड़ा।
पिता को खाना खिलाया फिर दी जान
कैलाश जब 14 साल का था तभी उसकी मां का निधन हो गया था। घर में सबसे छोटा होने पर भी वह बड़े सदस्य जैसी जिम्मेदारी निभाता था। वह पिता के साथ रहता था। पिता के लिए सुबह का खाना बनाना फिर काम करना और रात को खाना बनाकर खिलाना उसकी दिनचर्या में शामिलथा। सोमवार को भी पिता को खाना बनाकर खिलाने के बाद वह घर से निकला था।