यूक्रेन में फंसे भारतीयों का स्वदेश पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। भारत सरकार ने मिशन एयरलिफ्ट के तहत छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को वहां से वतन वापस लाने का अभियान शुरू किया है। टिहरी जिले की एमबीबीएस की छात्रा अदिति कंडारी भी रविवार देश शाम को सकुशल नई टिहरी पहुंच गई है। बेटी को अपने बीच पाकर परिजन खुशी से झूम उठे। रोमानिया बार्डर पहुंचने के लिए आदिति और उसके साथियों को आठ किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ी। बेटी के सकुशल वापस घर पहुंचने पर कंडारी परिवार ने केंद्र और राज्य सरकार का आभार जताया है।
रविवार को यूक्रेन के चेरनिव्तसी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की द्वितीय वर्ष की छात्रा अदिति कंडारी विशेष विमान से दिल्ली पहुंची। उसके पिता दर्मियान सिंह कंडारी व मां राजेश्वरी देवी को जैसे ही बेटी के स्वदेश पहुंचने की सूचना मिली, वह लाडली से मिलने के उत्सुक दिखे। मां और पिता नई टिहरी से सीधे देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट के लिए रवाना हुए। अदिति ने बताया कि रविवार 3.30 बजे यूक्रेन से दिल्ली होते हुए जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर उनकी फ्लाइट लैंड हुई। बेटी को जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर देखकर मां और पिता खुशी से झूम उठे।
बेटी के स्वदेश लौटने पर उन्होंने इष्ट और मित्रों के साथ-साथ शासन-प्रशासन का आभार जताया। कहा कि भारत सरकार से आग्रह है कि वहां फंसे छात्रों और अन्य पेशेवर युवाओं को तत्काल वापस भारत लाने के लिए विशेष प्रयास करें। अदिति के साथ कीर्तिनगर की आंकाक्षा और ऋषिकेश की दो अन्य लड़कियां भी यूक्रेन से उत्तराखंड पहुंची। अदिति ने बताया कि इन चार दिनों में उन्हें अहसास हुआ कि अपनों का साथ क्या होता है।
कहा कि हालांकि उनकी वीडियो कॉलिंग से माता-पिता से लगातार बात हो रही थी। बावजूद इसके वहां जो हालात हैं वह भयावह है। कहा कि ईश्वर से प्रार्थना है कि सबकुछ ठीक कर दे। बताया चेरनिव्तसी मेडिकल कॉलेज से वह बस में रोमानिया बार्डर से आठ किमी पहले पहुंची। वहां जाम होने के कारण रोमानिया बार्डर पहुंचने के लिए आठ किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ी। बताया यूक्रेन और रास्ते में उन्हें खाने पीने की कही कोई दिक्कत नहीं आई।
परिजनों ने ली राहत की सांस
यूक्रेन में फंसी लैंसडौन की बेटी संस्कृति अग्रवाल के शनिवार रात आठ बजे मुंबई एयरपोर्ट पहुंचने के बाद उसके माता-पिता व अन्य परिजनों ने राहत की सांस ली। मुंबई में एयर इंडिया के विमान के उतरने की सूचना मिलने के बाद परिजनों की खुशी का ठिकाना न रहा। उसके पिता अजय अग्रवाल व बेटे अभि अग्रवाल की आंखों से खुशी के आंसू छलक आए। रविवार को संस्कृति अपनी मां के पास प्रगति विहार देहरादून पहुंच गई है। रोमानिया से 219 भारतीयों को लेकर एयर इंडिया की पहली उड़ान शनिवार रात आठ बजे मुंबई पहुंची। इसमें उत्तराखंड के लौटने वाले चार छात्रों में एक यूक्रेन के बुकोविनियां मेडिकल यूनिवर्सिटी की मेडिकल प्रथम वर्ष की छात्रा व लैंसडौन निवासी संस्कृति अग्रवाल भी थीं। छात्रा के पिता अजय अग्रवाल लैंसडौन में रहते हैं। जबकि माता निशा अग्रवाल देहरादून में निवास कर रही हैं। रोमानिया से यह विमान 26 फरवरी की सुबह रवाना हुआ था।
संस्कृति के पिता अजय अग्रवाल ने बताया कि सात फरवरी, 2022 को वह जॉलीग्रांट से अहमदाबाद गई थी। जहां से वह कीव से 100 किलोमीटर दूर स्थित शहर चेरनोविस्ट पहुंची थी। रूस और यूक्रेन विवाद के बाद से वे सहमे जरूर थे पर उन्हें इस विवाद के बढ़ने की उम्मीद नहीं थी। रूस के यूक्रेन पर हमले ने उनकी दिन व रात की नींद उड़ा रखी थी। उन्होंने बताया कि वह बेटी की सलामती की लगातार प्रार्थना कर रहे थे। बेटी की चिंता में उन्होंने दो दिनों तक खाना भी नहीं खाया। यही हाल माता निशा का भी था। उन्होंने बताया कि रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद बेटी यूनिवर्सिटी के बेसमेंट में दो दिनों से थी। वह भगवान के शुक्रगुजार हैं कि पहली उड़ान में उनकी बेटी भी शामिल थी। इस मुश्किल समय में भारतीय छात्रों की सुरक्षित वापसी के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों को लेकर उन्होंने सरकार का आभार जताया।
ऊखीमठ की लिपाक्षी पहुंचीं रोमानिया, जल्द लौटेंगी घर
नगर पंचायत ऊखीमठ के उदयपुर वार्ड निवासी व यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही लिपाक्षी कुंवर सकुशल रोमानिया पहुंच गई हैं। वह शनिवार को यूक्रेन से तिरंगा लगे वाहन से बॉर्डर पहुंचीं और वहां से हवाई सेवा से रोमानिया। अवंतिका भट्ट, अंकित मिंगवाल और उत्कर्ष शुक्ला अभी यूक्रेन में फंसे हुए हैं। यूक्रेन से रोमानिया पहुंच चुकी लिपाक्षी ने रविवार को अपने माता-पिता से वीडियो कॉल पर बातचीत की। उन्होंने बताया कि वह पूरी तरह से सुरक्षित हैं और उनका वहां अच्छा ख्याल रखा गया। उन्होंने बताया कि शनिवार को वह यूक्रेन से तिरंगा लगे वाहन से अन्य साथियों के साथ बॉर्डर पहुंचीं और वहां से हवाई जहाज की मदद से रोमानियां पहुंचाई गई।
यूक्रेन में हर चौराहे व सार्वजनिक स्थलों पर चेकिंग हो रही है। लिपाक्षी की माता सुधा कुंवर ने बताया कि भारत सरकार के प्रयास से उनकी बेटी सकुशल पहुंच रही है। दूसरी तरफ नागजगई निवासी उत्कर्ष शुक्ला ने यूक्रेन से अपने पिता से बातचीत कर बताया कि शनिवार को उन्होंने बंकर में ही रात गुजारी लेकिन रविवार को वह बाहर आ गए थे। उधर, अवंतिका भट्ट और अंकित चंद्र मिंगवाल के माता-पिता ने उनसे बातचीत की। दूसरी तरफ बच्छणस्यूं के झुंडोली गांव के धूम सिंह रावत भी यूक्रेन में फंसे हुए हैं। इधर, उत्तराखंड क्रांतिदल के मोहित डिमरी ने रविवार को यूक्रेन में फंसे धूम सिंह रावत से व्हाट्सएप के जरिए बातचीत की।
यूक्रेन से पहुंचीं आकांक्षा अपने घर
यूक्रेन से श्रीनगर निवासी आकांक्षा कुमारी सुरक्षित अपने घर पहुंच गईं हैं। यहां के दो युवा अब भी यूक्रेन में ही हैं। श्रीनगर के निरजंनी बाग निवासी रोहित वर्मा और बिलकेदार निवासी आकांक्षा यूक्रेन के चेर्नवित्सी शहर में स्थित बुकावियन मेडिकल कॉलेज और श्रीकोट निवासी मृणाल भट्ट यूजार्ड यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहे हैं। इनमें से आकांक्षा सुरक्षित अपने वतन पहुंच गईं। आकांक्षा रोमानिया से हवाई जहाज से शनिवार रात लगभग आठ बजे मुंबई पहुंचीं। वहां से अपनी तीन अन्य साथियों के साथ रविवार सुबह लगभग 10 बजे हवाई मार्ग से दिल्ली पहुंचीं। इसके बाद वह लगभग तीन बजे जौलीग्रांट एयरपोर्ट देहरादून पहुंची। वहां उनके पिता ईश्वर प्रसाद और भाई विकास उसका इंतजार कर रहे थे। वहीं, रोहित अभी चेर्नवित्सी और मृणाल यूजार्ड में मौजूद हैं। रोहित ने बताया कि रोमानिया बार्डर पर काफी भीड़ हो गई है। यहां खाने-पीने और कैश की कोई दिक्कत नहीं है। वहीं मृणाल के फुफेरे भाई भास्कर नौटियाल के अनुसार यूजार्ड में कोई समस्या नहीं है। हालात सामान्य हैं।
यूक्रेन में फंसे छात्रों को वापस लाने की लगाई गुहार
यूक्रेन के खार्कीव शहर में फंसे उत्तरकाशी के आशुतोष कुड़ियाल व पुरोला के दो चचेरे भाई-बहन के परिजन अपने बच्चों को लेकर चिंतित हैं। परिजनों का कहना है कि बच्चों को वहां अब खाना भी भरपेट नहीं मिल पा रहा है। छात्रावास में एक बच्चे को दो रोटी सुबह और दो शाम को जारी हो रही है। वहीं कुछ छात्रों ने भूमिगत मेट्रो टनल में शरण ली हुई है। परिजनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शीघ्र वहां फंसे भारतीय छात्रों को सकुशल वापस लाने की गुहार लगाई है।
उत्तरकाशी के भैरव चौक निवासी आशुतोष कुड़ियाल और पुरोला के दो चचेरे भाई बहिन विनायक थपलियाल व अस्मिता थपलियाल यूक्रेन से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। वो रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद से वहां फंसे हुए हैं। आशुतोष कुड़ियाल के पिता भूपेश कुड़ियाल का कहना है कि जब रूस भारत का मित्र देश है तो भारत सरकार वहां फंसे भारतीय छात्रों को वापस निकालने में क्यों देरी कर रही है। उनके बेटे सहित करीब पांच हजार भारतीय छात्र खार्कीव शहर में फंसे हुए हैं जो कि भूमिगत मेट्रो टनल में शरण लिए हुए हैं। वहां बाथरूम तक उपलब्ध नहीं है। उधर, यूक्रेन में फंसे पुरोला के विनायक व अस्मिता के परिजन भी अपने बच्चों की सलामती को लेकर चिंतित है। विनायक के पिता रमेश थपलियाल ने बताया कि अब वहां बच्चों को भरपेट भोजन भी नहीं मिल रहा है। पीने का पानी भी बच्चों ने एक हफ्ते तक का स्टोर कर रखा था लेकिन वो भी अब समाप्त होने वाला है।