शुक्रवार को सहस्त्रधारा रोड स्थित एक रेस्त्रां में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ‘ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग’ के उपाध्यक्ष एसएस नेगी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में लोग वापस गांवों में लौटकर काम करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें काम शुरू करने में कई तरह की दिक्कतें होती हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में पलायन से संबंधित कोई नया आंकड़ा नहीं है। वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर पलायन के दावे किए जाते हैं, लेकिन सटीक जानकारी नहीं है। इसके लिए सभी 7500 ग्राम पंचायतों में एक से 25 जनवरी तक विस्तृत सर्वे किया जा रहा है।
इसमें पलायन के कारणों की पड़ताल, कितने लोगों ने पलायन किया, किन प्रमुख क्षेत्रों से सबसे ज्यादा पलायन हुआ, पलायन करके लोग कहां गए, कितने गांवों की आबादी शून्य रह गई, आबादी में कितने फीसदी की बढ़ोतरी हुई जैसे सवालों का जवाब ढूंढा जाएगा।
उन्होंने बताया कि नेशनल सैंपलिंग सर्वे की मदद से 24 प्रश्नों की सूची तैयार की गई है। सभी ग्राम पंचायतों में यह फॉर्म भरकर उनका विश्लेषण किया जाएगा। सरकार को अपनी रिपोर्ट में इन कारणों को बताने के साथ ही आयोग यह भी बताएगा कि किन बिंदुओं पर काम कर लोगों को वापस लाया या गांवों में रोका जा सकता है।
उपयोगी साबित होगी वेबसाइट
पलायन आयोग अगले 10 दिन में अपनी वेबसाइट
www.uttarakhandpalayanayog.org लांच करेगा। इसमें लोग अपने सुझाव देने के साथ ही गांवों से जुड़ी समस्याएं भी दर्ज करा सकेंगे। साथ ही वे अपनी समस्याओं को लेकर भी संपर्क कर सकेंगे, जिनका निस्तारण आयोग करेगा।