स्कूल फीस में तय प्रक्रिया के बिना नहीं कर सकेंगे बदलाव
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। प्रदेश के सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड से संबद्ध स्कूलों को कर्मचारियों की न सिर्फ सेवा शर्तें तय करनी होगी बल्कि इसका पालन भी करना होगा। उन्हें अशासकीय स्कूल कर्मचारियों की तरह सेवानिवृत्त लाभ भी देने होंगे। वहीं, स्कूल फीस में भी तय प्रक्रिया के बिना बदलाव नहीं किया जाएगा।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किया है। निर्देश में कहा गया है कि प्रदेश में संचालित सीबीएसई, आईसीएसई बोर्ड से संबद्धता प्राप्त निजी स्कूलों की शिकायतों पर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड नई दिल्ली की अधिसूचना के अनुसार कार्रवाई की जानी है। अधिसूचना में स्पष्ट है कि स्कूल उसी सीमा में शुल्क लेंगे जिसमें स्कूल के संचालन के लिए खर्चों को पूरा किया जा सके। कोई भी निजी स्कूल छात्रों के दाखिले के लिए चंदा या प्रतिव्यक्ति शुल्क नहीं लेगा। स्कूलों को अपनी वार्षिक रिपोर्ट तैयार करनी होगी। जिसमें नाम, डाक पता, ई-मेल, दूरभाष संख्या, शिक्षकों के बारे में जानकारी, छात्रों की संख्या हर साल 15 सितंबर से पहले स्कूल की वेबसाइट पर देनी होगी। स्कूल में दस प्रतिशत सीटें अनुसूचित जाति, जनजाति के लिए आरक्षित होंगी। बच्चों की सुरक्षा के लिए समय-समय पर जारी निर्देशों का पालन करना होगा। यदि किसी स्कूल ने भूमि पर अवैध कब्जा किया है तो एनओसी को वापस लिया जाएगा। निर्देश में कक्षावार छात्र-छात्राओं के बस्ते का बोझ कम करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी सीईओ को जारी निर्देश में कहा गया है कि यदि कोई स्कूल तय शर्तों का पालन नहीं करता है तो उसकी जांच कर उसे नोटिस जारी किया जाए। इसके बाद भी स्कूल शर्तों का पालन नहीं करते हैं तो उनकी मान्यता समाप्त करने की कार्रवाई करें।