निजी स्कूल ने शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत बच्चों को दाखिला देने से इंकार कर दिया तो अभिभावक शिकायत लेकर बाल आयोग पहुंच गए। बाल आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए बृहस्पतिवार को स्कूल प्रशासन को तलब किया। इस दौरान स्कूल पक्ष ने कहा कि उनका स्कूल अल्पसंख्यक स्कूल में आता है इसलिए वह आरटीई के तहत दाखिला नहीं दे सकते। इस दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।
बता दें कि डालनवाला स्थित सनवैली स्कूल में करीब 25 बच्चों को आरटीई के तहत दाखिला नहीं दिया गया। अभिभावक रोहित सैनी समेत अन्य अभिभावकों ने बाल आयोग में इसकी शिकायत की थी। उत्तराखंड बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने बताया कि शिकायत मिली है कि बच्चों को आरटीई के तहत लॉटरी में सनवैली स्कूल आवंटित हुआ था, लेकिन स्कूल ने दाखिला देने से इन्कार कर दिया। डॉ. गीता ने बताया कि जांच में पता चला था कि स्कूल में आरटीई के तहत रजिस्ट्रेशन ही नहीं था। इसके बाद स्कूल ने आरटीई के तहत रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया और इसी दौरान अल्पसंख्यक के लिए भी आवेदन कर दिया।
स्कूल ने बताया कि अल्पसंख्यक के दायरे में है
डॉ. गीता ने बताया कि स्कूल की ओर से कहा गया है कि स्कूल को अल्पसंख्यक स्कूल की मान्यता मिल गई है। अल्पसंख्यक स्कूलों पर आरटीई के तहत बच्चों को दाखिला देने की प्रक्रिया लागू नहीं होती है। इस संबंध में बाल आयोग ने अल्पसंख्यक कमीशन को भी पत्र लिखा गया है। सुनवाई के दौरान विनोद कपरवाण, डॉ. एसके सिंह मौजूद रहे।