ऐसे में अब डॉक्टरों और नर्सिंगहोम संचालकों का धैर्य खत्म होने लगा है। डॉ. चौधरी ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री ने आईएमए पदाधिकारियों की बैठक नहीं बुलाई और उत्तराखंड हेल्थकेयर एस्टेब्लिशमेंट एक्ट को लेकर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की तो 25 दिसंबर से सभी नर्सिंगहोम व क्लीनिक संचालक अस्पतालों में खुद ही तालाबंदी कर देंगे। इसके साथ ही अस्पतालों में भर्ती सभी मरीजों को सरकारी अस्पतालाें में भेज दिया जाएगा।
आईएमए ने फिर मांग उठाई है कि हरियाणा की तर्ज पर राज्य में संचालित 50 बेड तक के अस्पतालों को एक्ट में छूट दी जाए। साथ ही पंजीकरण शुल्क में कमी की जाए। लेकिन सरकार उनकी मांगोें को दरकिनार कर रही है। ऐसे में अब डॉक्टराें के सामने अस्पताल को खुद ही बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि बड़े अस्पतालों के लिए तो क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का पालन करना थोड़ा आसान है लेकिन छोेटे अस्पतालों के लिए मुसीबत भरा है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी अस्पताल संचालकों ने 13 नवंबर से तालाबंदी का एलान किया था। डॉक्टरों व अस्पताल संचालकों के प्रस्तावित आंदोलन को देखते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेेंद्र सिंह रावत ने आईएमए पदाधिकारियों को वार्ता के लिए बुुलाया था।
मुख्यमंत्री ने पदाधिकारियों को ‘उत्तराखंड हेल्थकेयर एस्टेब्लिशमेंट एक्ट’ का मसौदा तैयार करने को कहा था ताकि सरकार की ओर से सकारात्मक कदम उठाया जा सके लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो पाई है।