समग्र शिक्षा के तहत संचालित महत्वपूर्ण गतिविधियों में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर मुख्य शिक्षा अधिकारी एवं जिला परियोजना अधिकारी देहरादून गोविंद राम जायसवाल ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने राजकीय, अशासकीय एवं निजी सहायता प्राप्त विद्यालयों को 15 सितंबर तक निर्धारित गतिविधियों में शत-प्रतिशत छात्र या विद्यालय नामांकन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। लक्ष्य पूरा नहीं होने पर प्रधानाचार्यों का वेतन भी रोका जा सकता है। इसके अलावा विकासखंड के अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
पांच गतिविधियों में ऑटोमेटेड परमामेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (एपीएएआर आईडी), इको क्लब नोटिफिकेशन, स्वच्छ व हरित विद्यालय रेटिंग, प्रशस्त ऐप और एक पेड़ मां के नाम शामिल हैं। इस संबंध में 15 जुलाई को विकासखंड डोईवाला के राजकीय इंटर कॉलेज दूधली और 29 जुलाई को दून स्पेशल स्कूल विकासनगर में खंड व उप शिक्षा अधिकारियों और जिले के विद्यालयों की समीक्षा बैठक हुई थी। इन बैठकों में विभागीय निर्देशों का पालन करने के निर्देश दिए गए थे। बावजूद इसके 24 से 31 अगस्त तक समीक्षा की गई तो कई विद्यालयों में अपेक्षित प्रगति नहीं मिली। इसे विभागीय आदेशों के प्रति लापरवाही और कार्यदायित्व के प्रति उदासीनता माना गया है।
सीईओ की ओर से जारी आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि 15 सितंबर तक लक्ष्य पूरा नहीं करने वाले राजकीय और अशासकीय विद्यालयों के प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक व संबंधित पटल प्रभारी या शिक्षक का सितंबर 2026 का वेतन तत्काल प्रभाव से अग्रिम आदेश तक रोक दिया जाएगा। वहीं निजी विद्यालयों की लापरवाही पर सीबीएसई, आईसीएसई उपनियम और उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा अधिनियम के तहत विद्यालय की एनओसी वापस ले ली जाएगी। यही नहीं आरटीई की मान्यता को भी रद्द किया जा सकता है।
खंड शिक्षा व उप शिक्षा अफसरों पर भी होगी कार्रवाई
मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जायसवाल की ओर से बताया गया कि सभी खंड शिक्षा अधिकारियों और उप शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने विकासखंडों में गतिविधियों की लगातार समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। आगामी 15 सितंबर की जिला स्तरीय समीक्षा में संतोषजनक प्रगति नहीं मिलने पर संबंधित खंड कार्यालय और अधिकारी का सितंबर माह का वेतन भी रोक दिया जाएगा।