फीस नहीं देने पर रुड़की स्थित राजा महेंद्र प्रताप स्पोर्ट्स एकेडमी स्कूल के प्रधानाचार्या पर आरोप है कि उन्होंने पांच छात्रों को आधे घंटे तक धूप में खड़ा करने की सजा दे दी। जिसमें एक छात्र की हालत बिगड़ गई। छात्र को तेज बुखार आ गया।
अमानवीय व्यवहार से आक्रोशित परिजनों ने मामले की तहरीर पुलिस को दी है। पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है। वहीं प्रधानाचार्य ने भी एक अभिभावक पर स्कूल की बस को रास्ते में रोकने और चालक से अभद्रता करने का आरोप लगाते हुए तहरीर दी है।
कस्बा स्थित राजा महेंद्र प्रताप स्पोर्ट्स एकेडमी स्कूल में पढ़ रहे पांच छात्रों के परिजनों ने जुलाई माह की समय से जमा नहीं की। स्कूल की ओर से 21 जुलाई तक फीस जमा करने के निर्देश छात्रों को दिए थे, लेकिन कक्षा दो, कक्षा पांच और कक्षा सात के पांच छात्र फीस जमा नहीं कर पाए।
आरोप है कि बीते मंगलवार को प्रधानाचार्या ने फीस जमा नहीं करने वाले पांचों छात्रों को अपने ऑफिस में बुलाया और उन्हें फटकार लगाई। इसके बाद उन्हें धूप में खड़ा कर दिया।
इस दौरान एक छात्र की हालत बिगड़ गई। जिसे देख अन्य छात्रों को क्लास में भेज दिया गया। छात्रों ने घर आकर सारी बात अपने परिजनों को बताई। गुरुवार को परिजनों ने मामले की तहरीर नारसन चौकी पुलिस को दी है।
चौकी प्रभारी कुलवंत सिंह ने बताया कि छात्रों को सजा दिए जाने के मामले में तहरीर आई है। मामले की छानबीन की जा रही है। अभी मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है।
स्कूल ने भी दी तहरीर
वहीं स्कूल प्रबंधन ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। प्रधानाचार्य मंजू खेर ने बताया कि फीस जमा नहीं करने वाले छात्रों को सामान्य तौर पर यह कहा जाता है कि वह अपने अभिभावकों को फीस जमा कराने के लिए कहें।
ऐसा ही इन छात्रों के साथ भी हुआ था, लेकिन एक छात्र के अभिभावकों ने गुरुवार को अपने गांव से आ रही स्कूल की एक बस को रोका और चालक के साथ अभद्रता करते हुए बस में आग लगा देने की धमकी दी। इस संबंध में आरोपी के खिलाफ नारसन चौकी में तहरीर दी गई है।
बीईओ को सौंपी मामले की जांच
मामले को मुख्य शिक्षा अधिकारी अजय नौडियाल ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने बताया कि छात्रों को शारीरिक रूप से दंडित नहीं किया जा सकता है। छात्रों को फीस के लिए धूप में खड़ा किया जाना अमानवीय है।
यदि स्कूल ने छात्रों को इस प्रकार की सजा दी है तो यह बेहद गलत है। मामले की जांच कराएंगे। इसके लिए खंड शिक्षा अधिकारी नारसन को विद्यालय में जांच के लिए भेजा जाएगा। उनकी रिपोर्ट पर कार्रवाई की जाएगी।