कैलाश सिंह कबडवाल सिडकुल की एक फैक्ट्री में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है। वह बड़ी मुश्किल से परिवार का भरण पोषण कर रहा है। उनकी बेटी पूजा को वीरता पुरस्कार मिलने के बाद डान बॉस्को गर्ल्स स्कूल आमपड़ाव (नैनीताल) के स्वामी जेके चड्ढा ने उसे 12वीं तक मुफ्त में शिक्षा दी।
पूजा ने भी 12वीं में 91 फीसदी अंक हासिल किए। इंटर के बाद पूजा ने डाक्टर बनने का सपना देखा लेकिन आर्थिक स्थिति आड़े आने से सपना अधूरा रह गया है।
नीट की कोचिंग की व्यवस्था नहीं होने से उन्होंने बेटी पूजा को एमबी डिग्री कालेज हल्द्वानी में बीएससी में प्रवेश दिलाया है। उसके दोनों छोटे भाई किच्छा के एक शिशु मंदिर में पढ़ रहे हैं। पूजा अब एमएससी, पीएचडी करके कॅरिअर बनाना चाहती हैं लेकिन पढ़ाई जारी रखने के आड़े अब परिवार की खराब माली हालत आड़े आ रही है।
सोमेश्वर के गांव पच्चीसी में कैलाश कबडवाल का की पत्नी चंपा अपने तीन बच्चों के साथ रहती थी। कैलाश नौकरी के चलते बाहर रहते थे। 24 मई 2006 की रात मोहन सिंह महरा ने घर में घुसकर चंपा की चाकू मारकर हत्या कर दी। हत्या के बाद उसने जेवरात लूट लिए और घटना को अग्निकांड का रूप देने के लिए घर के भीतर आग लगा दी।
तीनों बच्चों को मरा मानकर दरवाजा बाहर से बंद करके फरार हो गया। आग लगने पर चंपा की छह वर्षीय बेटी पूजा ने साहस व धैर्य से काम लेते हुए अपने तीन वर्षीय भाई सौरव और डेढ़ वर्षीय सूरज को आग वाले कमरे से निकालकर दूसरे कमरे में ले गई। सुबह जब पड़ोसियों ने दरवाजा खोला तो भयभीत बच्चे बाहर आए और चंपा देवी की हत्या का पता चला। पूजा के चश्मदीद गवाह बनने पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया और वह आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा है।