स्मार्ट ग्राम के विचार को राष्ट्रपति भवन से मिली सैद्धांतिक सहमति के बाद देहरादून के राजपुर रोड स्थित प्रेसीडेंट एस्टेट में इसके पहले माडल के रूप में 12 आवासीय यूनिटें जल्द आकार लेंगी। राष्ट्रपति ने आपदा के लिहाज से संवेदनशील देहरादून को इसके लिए चुना है। स्मार्ट ग्राम कम लागत के सेनिटेशन इंटिग्रडेट कम्यूनिटी हाउसिंग सिद्धांत पर आधारित है।
प्राशक टेक्नो इंटरप्राइजेज की यह पेटेंट टेक्नोलॉजी है जिसमें निर्मित होने वाले भवन हर तरह की आपदा को सहने के साथ विकसित होने वाले क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाएंगे। फिलहाल 12 आवासीय यूनिट बनाई जाएंगी, जिन्हें प्रेसीडेंट एस्टेट का स्टाफ आवास के तौर पर इस्तेमाल कर सकेगा। एक उम्मीद के मुताबिक इसका काम एक जुलाई से शुरू हो सकता है।
स्मार्ट ग्राम का सिद्धांत स्मार्ट सिटी योजना से पूरी तरह अलग है। स्मार्ट ग्राम में टेक्नोलॉजी का उतना समावेश है जिससे वहां के प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके। विकसित होने वाले स्मार्ट ग्राम रोजगार और स्किल डेवलपमेंट को ध्यान में रखकर बना है।
राष्ट्रपति भवन में स्मार्ट ग्राम की प्रस्तुति के बाद राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की सैद्धांतिक सहमति के बाद प्रेसीडेंट एस्टेट देहरादून में मॉडल विकसित करने की अनुमति मिली है। प्राशक टेक्नो इंटरप्राइजेज के संस्थापक प्रफुल्ल आर नाइक ने बताया कि हमारे मॉडल के टेस्ट के लिए उत्तराखंड सबसे अनुकूल है।
स्मार्ट ग्राम पूरी तरह से आत्मनिर्भर मॉडल है जो हेबिटेक निवारा तंत्रा बिल्डिंग एंड सेनिटेशन टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन की तकनीक हमारी पेटेंट है। इस मॉडल में नेचुरल सेनिटेशन टेकनीक, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, सोलर पावर आदि को शामिल किया है। कम आय वाले लोगों की हाउसिंग परियोजनाओं में यह बेहद कारगर है। इसमें महज 4.75 लाख रुपये में साढ़े तीन सौ वर्ग फीट से अधिक का आवास बन जाता है।