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दून में यहां तैयार हो रहा राष्ट्रपति का स्मार्ट ग्राम

Tue, 31 May 2016 11:20 AM IST
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, देहरादून

सार

  • दून के प्रसीडेंट स्टेट में तैयार होगा स्मार्ट ग्राम मॉडल
  • राष्ट्रपति भवन ने प्राशक की विकसित तकनीक को दी सहमति
  • नवीनतम तकनीक के भवन किसी भी आपदा को झेलने में सक्षम 
  • इस तकनीक से ट्रीटमेंट प्लांट के बिना सीवरेज का होगा ट्रीटमेंट 
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गांव - फोटो : प्रतीकात्मक
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विस्तार
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स्मार्ट ग्राम के विचार को राष्ट्रपति भवन से मिली सैद्धांतिक सहमति के बाद देहरादून के राजपुर रोड स्थित प्रेसीडेंट एस्टेट में इसके पहले माडल के रूप में 12 आवासीय यूनिटें जल्द आकार लेंगी। राष्ट्रपति ने आपदा के लिहाज से संवेदनशील देहरादून को इसके लिए चुना है। स्मार्ट ग्राम कम लागत के सेनिटेशन इंटिग्रडेट कम्यूनिटी हाउसिंग सिद्धांत पर आधारित है।
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प्राशक टेक्नो इंटरप्राइजेज की यह पेटेंट टेक्नोलॉजी है जिसमें निर्मित होने वाले भवन हर तरह की आपदा को सहने के साथ विकसित होने वाले क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाएंगे। फिलहाल 12 आवासीय यूनिट बनाई जाएंगी, जिन्हें प्रेसीडेंट एस्टेट का स्टाफ आवास के तौर पर इस्तेमाल कर सकेगा। एक उम्मीद के मुताबिक इसका काम एक जुलाई से शुरू हो सकता है।

स्मार्ट ग्राम का सिद्धांत स्मार्ट सिटी योजना से पूरी तरह अलग है। स्मार्ट ग्राम में टेक्नोलॉजी का उतना समावेश है जिससे वहां के प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके। विकसित होने वाले स्मार्ट ग्राम रोजगार और स्किल डेवलपमेंट को ध्यान में रखकर बना है।
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राष्ट्रपति भवन में स्मार्ट ग्राम की प्रस्तुति के बाद राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की सैद्धांतिक सहमति के बाद प्रेसीडेंट एस्टेट देहरादून में मॉडल विकसित करने की अनुमति मिली है। प्राशक टेक्नो इंटरप्राइजेज के संस्थापक प्रफुल्ल आर नाइक ने बताया कि हमारे मॉडल के टेस्ट के लिए उत्तराखंड सबसे अनुकूल है।

स्मार्ट ग्राम पूरी तरह से आत्मनिर्भर मॉडल है जो हेबिटेक निवारा तंत्रा बिल्डिंग एंड सेनिटेशन टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन की तकनीक हमारी पेटेंट है। इस मॉडल में नेचुरल सेनिटेशन टेकनीक, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, सोलर पावर आदि को शामिल किया है। कम आय वाले लोगों की हाउसिंग परियोजनाओं में यह बेहद कारगर है। इसमें महज 4.75 लाख रुपये में साढ़े तीन सौ वर्ग फीट से अधिक का आवास बन जाता है।
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स्मार्ट ग्राम प्रोजेक्ट में यह होगा खास

स्मार्ट गांव - फोटो : अमर उजाला
आवासीय योजना के लिए ईंटे बनाए जाने के लिए उन्नत तकनीक
स्थानीय लोग स्वयं बना पाएंगे ऐसी ईंटे
भवन दीवारों पर प्लास्टर की जरूरत नहीं पड़ेगी
भवन निर्माण का खर्च 20 से 30 प्रतिशत होगा कम
सेनिटेशन में नोवेल एनारोविक बैफल रियक्टर होगी इस्तेमाल
सीवररेज ट्रीटमेंट प्लांट के इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा
पेयजल और सिंचाई के लिए रेनवाटर हार्वेस्टिंग तकनीक 

कौन हैं प्रफुल्ल आर नाइक?
आईआईटी बीएचयू से स्नातक, मास्टर्स और पीएचडी प्रफुल्ल ने फार्मा सेक्टर से कार्य शुरू कर उद्यमिता में खासा नाम कमाया है। उनके 40 से अधिक पेटेंट है और 140 पेटेंट के आवेदन विचाराधीन है। एशियन इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी थाईलैंड के साथ मिलकर हेबिटेक निवारा तंत्रा बिल्डिंग एंड सेनिटेशन टेक्नोलॉजी साल्यूशन को विकासशील देशों में संचालित कर रहे हैं। उद्यमिता और नई टेक्नोलॉजी विकसित करने के लिए उन्हें तीन बार नेशनल इंटलेक्चुअल अवार्ड, इडिया टेक्नोलॉजी लीडरशिप अवार्ड के साथ सीआईआई का इंडस्ट्रियल इनोवेशन अवार्ड भी मिला है।
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